गुरुवार, 3 सितंबर 2020

गिलोय के फायदे , giloy benifits in hindi ,




गिलोय एक  बहुवर्षीय लता होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते है। आयुर्वेद में इसको कई नामो से जाना  जाता है। यथा अमृता, गुडुची, छिन्नरहा, चक्रांगी, आदि बहुवर्षीय तथा अमृत के सामान गुणकारी होने से इसका नाम अमृता है। आयुर्वेद साहित्य में इसे ज्वर की महान औषधि माना गया है, एवं जीवंतिका नाम दिया गया है, जिस वृक्ष को यह अपना आधार बनाती है। उसके गुण भी इसमें समाहित रहते है। इस दृष्टी से नीम पर चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ औषधि मानी जाती है। इसका काण्ड छोटी अंगुली से लेकर अंगूठे जितना मोटा होता है। बहुत पुरानी गिलोय में यह बाहु जैसा मोटा भी हो सकता है। 


गिलोय के अवयव - एक ग्लूकोसाइड गिलोइन के कारण इसका स्वाद कड़वा होता है। इसमें कोलाम्बिन, टिनोस्पोरेसाइड, पॉमेटिन, बरशोरिंडाई, सैकेराइड, कोलीन तथा टीनोस्पोटिक एसिड पाया जाता है। यह सभी जैव सक्रिय पदार्थ है, इनकी पत्तियों में प्रचुर मात्रा में कैल्सियम फास्फोरस तथा प्रोटीन पाया जाता है। यह वात, कफ और पित्तनाशक होती है। इसमें एंटीवायरल और एंटीबायोटिक तत्त्व भी पाया जाता है।


मधुमेह के रोगियों के लिए - गिलोय एक ह्यपोग्लाइसेमिक एजेंट है, यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फायदा टाइप टू डयबिटीज के मरीजों को होता है। 


पाचन शक्ति बढ़ाती है -  यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामो को भली-भाति संचालित करती  है, और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद करती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बड़ियों से बचा रहता है।


कम करती है स्ट्रेस - गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुकी है। गिलोय एडप्टोजन की तरह कम करती है, और मानसिक तनाव और चिंता के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है। बल्कि मष्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरुस्त रहती है, और एकाग्रता बढ़ती है।  


आँखों की रोशनी के लिए - गिलोय को पलकों के उपर लगाने पर आँखों की रौशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाए। 


अस्थमा के रोगियों के लिए - मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा। 


गठिया के रोगियों के लिए -  गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ो में दर्द होता है, बल्कि चलने फिरने में भी परशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते है। जिसकी वजह से यह जोड़ो के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुँचाती है।


एनीमिया के रोगियों के लिए - भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित रहती है। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है, और एनीमिया से छुटकारा मिलता है। 


कान का मैल निकालने के लिए - कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है, तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल ले और ठंडा करके छान ले और कुछ बूँद कान में डाले। एक-दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर आएगा।   


पेट की चर्बी कम करने के लिए - गिलोय शरीर के उपापचय को ठीक करती है, सूजन कम करती है, और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है।


यौनेच्क्षा बढ़ाती है गिलोय - आप किसी दवा के बिना यौनेच्क्षा बढ़ाना चाहते है, तो गिलोय का सेवन कर सकते है।  गिलोय में यौनेच्क्षा बढ़ाने वाले गुण पाए जाते है, जिससे यौन सम्बन्ध बेहतर होते है। 


पीलिया  में गिलोय के फायदे - पीलिया में गिलोय के 4-5 पत्तो और 5 इंच की लता को लेकर जूस निकालकर हर एक दिन छोड़कर पूरे 10 दिन पीने से पीलिया से छुटकारा मिल जाता है, इसकी लताओं का काढ़ा भी तैयार करके पिया जा सकता है। चूकी इसका स्वाद थोड़ा तीखा होता है, इसलिए इसमें थोड़ी सी मिश्री भी मिला सकते है। (जिनको मधुमेह न हो )  




गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालो पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है   


जवा रखती है गिलोय - गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते है, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे मुहांसे बारीक लकीरे और झुर्रिया दूर की जा सकती है। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते है। जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते है। तो घाव जल्दी भरते है। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाये अब एक बर्तन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबाले गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाये ठंडा करके घाव पर लगाए इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है।


बालो की समस्या के लिए - अगर आप के बालो में डैंड्रफ, बाल झड़ने या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओ से जूझ रहे है, तो गिलोय के सेवन से आपकी ये समस्याए भी दूर हो जाएंगी। 


गिलोय जूस - गिलोय की डंडियों को छील ले और इसमें पानी में मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस ले छान के  सुबह-सुबह खाली पेट पी ले। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है।    


गिलोय का काढ़ा - चार इंच लम्बा गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट ले इन्हे कूट कर एक कप पानी में उबाल ले पानी आधा होने पर इसे छान कर पिए अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग,अदरक,तुलसी भी डाल  सकते है। 


गिलोय पाउडर - यू तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है, पर आप इसे घर पर भी बना सकते है, इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सूखा ले सूख जाने पर मिक्सी में पीसकर पाउडर बनाकर रख ले। 


गिलोय वटी - बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती है, अगर आपके घर पर या आस-पास ताज़ा गिलोय उपलब्ध नहीं है, तो आप इनका सेवन करे। 



अलग-अलग बीमारियों में प्रयोग - अरंडी यानि कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउठ (जोड़ो का गठिया ) की समस्या में आराम मिलता है, इसे अदरक के साथ मिलाकर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है। चीनी के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर सम्बन्धी बीमारियां दूर होती है। आर्थराइटिस से आराम के लिए इसे घी के साथ इस्तेमाल करे। कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खाये।


साइड इफ्फेक्ट का रखे ध्यान - वैसे तो गिलोय को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आये है,लेकिन चूकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नज़र रखे की ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाए। 


पीलिया की तासीर कैसी है - हर मौसम में गिलोय खाना ठीक नहीं माना जाता है। आयुर्वेद की किताबो में गिलोय की तासीर गर्म बतायी गई है। सर्दी-जुकाम और बुखार में  गिलोय लाभदायक है। 


वर्षाऋतु का काल है अपने घर में बडे गमले या आँगन में जहां भी उचित स्थान हो गिलोय की बेल अवश्य लगाए एवं स्वजन को भी देवे यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नहीं बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय अवदान है।




गुरुवार, 13 अगस्त 2020

इलायची के फायदे, elaichi benefits in hindi

 


इलायची का सेवन आमतौर पर मुखशुद्धि के लिए अथवा मसाले के रूप में किया जाता है। यह दो प्रकार की आती है, हरी या छोटी इलायची तथा बड़ी इलायची जहाँ वयंजनो को लजीज बनाने के लिए एक मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है, वही हरी इलायची मिठाइयों की खुशबू बढाती है। मेहमानो की आवाभगत में भी इलायची का इस्तेमाल होता है। लेकिन इसकी महत्ता केवल यही तक सीमित नहीं है। यह औषधीय गुणों की खान है। संस्कृत में इसे एला कहा जाता है। ये पाचनबर्धक तथा रूचिवर्धक होते है। 

                                                         


इलायची  के  प्रकार - इलायची मुख्यतः दो प्रकार की होती है छोटी इलायची और बड़ी इलायची जहाँ छोटी इलायची का प्रयोग मुख्यतः अतिथिसत्कार मुखशुद्धि और मिठाइयों, पकवानो को सुगन्धित बनाने के लिए होता है, तो वही बड़ी इलायची का प्रयोग मुख्यतः सब्जियों को स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है। और दोनों तरह की इलायची का प्रयोग विभिन्न तरह के रोगो के उपचार को ठीक करने के लिए भी किया जाता है। आयुर्वेदिक मतानुसार इलायची शीतल, तीक्षण, मुख को शुद्ध करने वाली, पित्तजनक तथा वात, श्वास, खांसी, बवासीर, क्षय, वस्तिरोग, सुजाक, पथरी, खुजली, मूत्रवृक्ष तथा ह्रदय रोग में लाभदायक है।

इलायची से होने वाले फायदे 

1 - खराश - यदि आपकी आवाज बैठी हुई है या गले में खराश है, तो सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले छोटी  इलायची चबाकर खाये तथा गुनगुना पानी पिए। इसके सेवन से गले में होने वाले दर्द में आराम मिलगा।

2 - सूजन -  गले में सूजन आ गई हो तो मूली के पानी में छोटी इलायची पीसकर सेवन करने से लाभ होता है। 

3 - खांसी - सर्दी खांसी और छींक होने पर एक छोटी इलायची, एक टुकड़ा अदरक, लौंग तथा पाँच तुलसी के पत्ते एक साथ पान में रखकर खाये।   

4 - उल्टी - बड़ी इलायची पाँच ग्राम लेकर आधा लीटर पानी में उबाल ले। जब पानी एक चौथाई रह जाए, तो उतार ले यह पानी पीने से उल्टियाँ बंद हो जाती है।

5 - छाले - मुँह में छाले हो जाने पर बड़ी इलायची को महीन पीसकर और उसमे पीसी हुई मिश्री मिलाकर जबान पर रखे तुरंत लाभ होगा। 

6 - बदहजमी - यदि केले अधिक मात्रा में खा लिए हो तो तत्काल एक इलायची खा ले। केले पच जाएंगे और आपको हल्कापन महसूस होगा।  

7 - जी मचलाना - बहुत लोगो को यात्रा के समय चक्कर आते है या जी घबराता है, इससे निजात पाने के लिये एक छोटी इलायची मुँह में रख ले  आराम मिलेगा।  

8 - फेफड़ो के समस्या के लिए - छोटी इलायची से फेफड़ो में रक्त संचार तेज गति से होने लगता है। इससे सांस लेने की समस्या जैसे अस्थमा, तेज जुकाम, और खांसी से राहत मिलती है, आयुर्वेद में इलायची की तासीर गर्म मानी है। जो कि शरीर को गर्मी देती है, इसलिए इसके सेवन से आपके शरीर पर ठण्ड का असर कम होता है। 

9 - रक्तचाप ठीक रखने के लिए - छोटी इलायची में पोटैशियम, फाइबर, होता है। जो BLOOD PRESSUR को नियंत्रित करता है। मानव शरीर में अधिकत्तर बीमारिया उच्च रक्तचाप के कारण जन्म लेती है, यदि आप भी प्रतिदिन दो से तीन इलायची का सेवन करे तो जिंदगी भर आपका रक्तचाप नियंत्रित रहेगा। 

10 - मुँह की दुर्गंध दूर करे - छोटी इलायची स्वाद बढाने के साथ ही माउथ फ्रेशनर का भी काम करती है, इसे खाने से मुँह की बदबू में राहत मिलती है, यदि आपके मुँह से तेज दुुर्गंध आती है, तो आप हर समय एक इलायची अपने मुँह में रख सकते है। इससे आपके मुँह से दुर्गन्ध आना बंद  हो जाएगा। 

11 - कब्ज में राहत - कब्ज से परेशान लोगो को छोटी इलायची का सेवन करना चाहिए, कब्ज की समस्या होने पर छोटी इलायची को पकाकर तैयार किये गए पानी का सेवन आपको फायदा पहुचायेंगा, यह आपकी पाचन क्रिया को दुरुस्त कर कब्ज से राहत देती है।

12 - उल्टी में राहत - यदि आपको सफर में उल्टी की समस्या होती है, तो आपको सफर शुरू करने से पहले छोटी इलायची का सेवन करना चाहिए छोटी इलायची आपको इस समस्या से राहत देगा, यदि आपको लगता है कि सफर में उल्टी की समस्या सफर में पूरे समय हो सकती है तो आप पूर रास्ते छोटी इलायची मुँह में रख सकते है। 

13 - विषाक्त पदार्थो से छुटकारा - शरीर में विषाक्त पदार्थो की अधिकता होने पर आपकी तबियत ज्यादा खराब हो सकती है, इलायची का सेवन शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थो को दूर करने में कारगर है, जो आपको बीमार नहीं होने देता है, इसलिए जरूरी है कि आप प्रतिदिन इलायची का सेवन करे और यदि आप प्रतिदिन इलायची का सेवन नहीं कर सकते है, तो हफ्ते में तीन से चार बार इलायची का सेवन अवश्य करे। 


14 - एसिडिटी से राहत - आपको बता दे कि इलायची में तेल भी मौजूद होता है, इलायची में मौजूद एसेंशियल आयल पेट की अंदरूनी लाइनिंग को मजबूत करता है, एसिडिटी की समस्या से पेट में एसिड जमा हो जाते है। इसके सेवन से वो धीरे-धीरे हट जाते है।और एसिडिटी से राहत मिलता है। 

15 - तनाव से मुक्त रखे - यदि आप अक्सर तनाव में रहते है, तो इलायची का सेवन आपके लिए गुणकारी साबित होगा, कई बार होता है कि आप अकेले है और ज्यादा तनाव से गुजर रहे है, तो ऐसे में दो इलायची मुँह में डालकर चबाये इलायची चबाने से हार्मोन में तुरंत बदलाव हो जाता है, और आप तनाव से मुक्त हो जाते है। 

16 - ख़राब बैक्टेरिया से लड़ने में मदद करे - इलायची आपको ख़राब बैक्टीरिया और बदबू से दूर रहने में मदद करता है। इलायची का सबसे बड़ा फायदा यह है, कि यह आपके मुँह में होने वाले बैक्टीरिया को दूर रखता है, और साथ ही दांतो की बिमारी को भी दूर रखता है। 

17 - हिचकी बंद करे - हम सभी को कभी-कभी अचानक हिचकी आने लगती है, इसकी कोई दवा तो नहीं बनी है, परन्तु कुछ नेचुरल तरीके से इसे बंद किया जा सकता है। कई बार ये बहुत देर तक लगातार आती है, जिससे परेशानी महसूस होती है। इसे बंद करने के लिए आपको इलायची मुँह में रखनी है। इसे चबाते रहिये कुछ देर में हिचकी गायब हो जायेगी। 

18 - दिमाग को मजबूत करे -  इलायची दिमाग को मजबूत करने और आँखों की रौशनी बढ़ाने व् याददाश्त बढ़ाने में इलायची बहुत मददगार है। इलायची के दानो को 2-3 बादाम व 2-3 पिस्ता के साथ 250 मिली दूध में इसे मिलाकर आधा होने तक उबाले और जब ये आधा हो जाए तो इसमें मिश्री मिलाये और इसे पी ले ये बच्चो के लिए बहुत फायदेमंद है। 

19 - दिल की रक्षा - इलायची में मौजूद खनिज तत्व दिल की रक्षा करने में सहायक है। इलायची खाने से पल्सरेट सही रहता है व खून का संचालन सुचारू रूप से होता है।

20 - वजन घटाने में सहायक - रात को सोने से पहले एक या दो इलायची चबाये और ऊपर से एक गिलास गर्म पानी पिए। इलायची में मौजूद फाइबर, कैल्सियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम विटामिन-बी1, बी-6, और विटामिन-सी आपके अतिरिक्त वजन को घटाने में सहायक है। 

21 - मूत्रविकार में लाभ - आयुर्वेद में इलायची का उपयोग मूत्रपथ के रोगो और सिस्टिटिस, नैफ्रैटिस,और गोनोरिया जैसे संक्रमणों के लिए एक उपाय के रूप में किया गया है।   

22 - एनीमिया से लड़ने में फायदेमंद - इलायची का एक अन्य प्रमुख घटक तांबा, लोहा और आवश्यक विटामिन जैसे राइबोफ्लेमिन, विटामिन-सी और नियासिन है। लोहे के अलावा लाल रक्त कोशिकाओं और सेलुलर चयापचय तांबा, राइबोफ्लेबिन विटामिन-सी और नियासिन के उत्पादन में इसके अत्यधिक महत्व के लिए जाना जाता है। एक गिलास गर्म दूध में एक चुटकी इलायची पाउडर और हल्दी मिलाये। आप चाहे तो स्वाद के लिए थोड़ी चीनी मिला सकते है, यह हर रात पीना कमजोरी और एनीमिया और एनीमिया के अन्य लक्षणों को दूर करने में मदद करता है। 

इलायची के नुकसान 

1 - एलर्जी - ज्यादा मात्रा में इलायची खाने या फिर लगातार इलायची खाने से शरीर में रिएक्शन होने लगता है। और फिर एलर्जी होने लगती है, जिससे शरीर में खुजली, स्किन रेशेश, लाल धब्बे आ जाते है। कई लोगो को इलायची से एलर्जी का अनुमान नहीं होता और वे इसे खा लेते है, जिससे उन्हें सांस में तकलीफ होने लगती है। इस एलर्जी के कुछ लक्षण है- 

- सीने व गले में खिचाव व दर्द                                                                                                                           

- सांस लेने में परेशानी 

- जी मचलाना 


2 - पथरी - कई बार इलायची पथरी का कारण बन जाती है, एक शोध के अनुसार पता चला है, कि हमारा शरीर इलायची को पूरी तरह पचा नहीं पाता है, और फिर अत्यधिक मात्रा में इसे लेने से ये धीरे-धीरे इकट्ठे होते जाते है, और गॉलब्लैडर स्टोन का कारण बन जाता है। पथरी के रोगियो को इलायची से परहेज करना चाहिए। 

https://www.instagram.com/yegoodhealth/                                                                                               https://www.facebook.com/yegoodhealth

मंगलवार, 11 अगस्त 2020

दालचीनी के फायदे और नुकसान


दालचीनी हमारे घरो में आसानी से मिलने वाले मसालों में से एक है, और यह हमारे सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।और इसके विविध फायदे है, आजकल लोग बहुत ही छोटी-छोटी बीमारियों से परेसान रहते है। जबकि दालचीनी हमारे घरो में बड़ी आसानी से मिल जाते है, और हम इसका उपयोग करके इन बीमारियों से छुटकारा पा सकते है। तो आइये आज हम दालचीनी के फायदे के बारे में जानकारी लेते है। 
  
दालचीनी एक छोटा सदाबहार पेड़ है, जो 10 -15 मी. उँचा होता है । यह लौरेसिई (lauraceae) परिवार का वृक्ष है।  यह श्रीलंका एवं दक्षिण भारत में बहुतायत में मिलता है। इसकी छाल मसाले की तरह प्रयोग होती है, इसमें एक अलग ही सुगंध होती है, जो की इसे गरम मसालो की श्रेणी में रखती है। इसकी पत्तियों के तेल से मच्छर भगाया जाता है। इसका उपयोग सब्जियों को स्वादिष्ट बनाने में किया जाता है। 
 
गरम मसालों और औषधि के रूप में प्रयुक्त दालचीनी सिंनोमोमम जाइलैनिकम ब्रेन पेड़ की छाल का नाम है। जिसे अंग्रजी में कैसियाबार्क का बृक्ष कहा जाता है। इसका पेड़ श्रीलंका,भारत,पूर्वी द्वीप, तथा चीन इत्यादि देशो में साधारणतया सुलभ है।  

गरम मसालों के  रूप में इसका उपयोग भारत में हजारो वर्षो से होता आ रहा है। इसका वर्णन संस्कृत के प्राचीन ग्रंथो में भी प्राप्त होता है। इतिहास के अध्ययन से भी ज्ञात होता है, कि इसका निर्यात अरब, मिस्र, ग्रीस, इटली और यूरोप के सभी देशो में होता था। बाइबिल में भी इसका उल्लेख है। आयुर्वेद में दालचीनी को एक बहुत ही फायदेमंद औषधि के रूप में बताया गया है। आयुर्वेद के अनुसार दालचीनी के इस्तेमाल से कई रोगो का इलाज किया जा सकता है।

दालचीनी के सेवन से पाचनतंत्र सम्बन्धी विकार, दांत व सिर दर्द, चर्म रोग मासिक धर्म की परेशानियां ठीक की जा सकती है। दस्त और टीबी में भी इसके प्रयोग से लाभ मिलता है। आप जरूर जान ले की दालचीनी के इस्तेमाल से कितने प्रकार के फायदे होते है, ताकि समय पर दालचीनी का उपयोग कर आप भी फायदा ले सके। दालचीनी भूख बढाती है,दांत के दर्द से आराम दिलाती है। दस्त से आराम दिलाती है, और खांसी ठीक करने में मदद करती है।

दालचीनी के विभिन्न रोगो में होने वाले उपयोग 

1-भूंख बढ़ाने के लिए -500 मिग्रा० शुंठी चूर्ण, 500  मिग्रा०, इलायची, तथा 500 मिग्रा०, दालचीनी को पीस ले। भोजन के पहले सुबह-शाम लेने से भूख बढती है। 

2-उल्टी रोकने के लिए -दालचीनी का प्रयोग उल्टी रोकने के लिए भी किया जाता है। दालचीनी और लौंग का काढ़ा बना ले। 10 -20 मिली मात्रा में पिलाने से उल्टी पर रोक लगती है।

3-आँखों के रोग में दालचीनी का प्रयोग - अनेक लोग बराबर शिकायत करते है, की उनकी आँखे फड़कती रहती है। दालचीनी का तेल आँखों के ऊपर (पलक) लगाए। इससे आँखों का फड़कना बंद हो जाता है, और आँखों की रौशनी भी बढ़ती है। 

4-दांत के दर्द में -  जिनके दांत दर्द में शिकायत रहती है, वे लोग दालचीनी का फायदा ले सकते है। दालचीनी के तेल को रूई से दांतो में लगाए इससे आराम मिलेगा दालचीनी के 5-6 पत्तो को पीसकर मंजन करे, इससे दांत साफ और चमकीले हो जाते है।  

5-सिरदर्द में प्रयोग - अगर आप सिरदर्द से परेशान रहते है, तो दालचीनी का सेवन करे , दळचनी के 8 -10 पत्तो को पीसकर लेप बना ले, दालचीनी के लेप को मस्तक पर लगाने से ठंड या गर्मी से होने वाली सरदर्द से आराम 
 मिलता है। आराम मिलने पर लेप को साफ कर ले।  

दालचीनी के तेल से सिर पर मालिश करे। इससे सर्दी की वजह से होने वाले सिरदर्द से आराम मिलती है।

दालचीनी तेजपत्ता तथा चीनी को बराबर-बराबर मात्रा में मिला ले इसे चावल धोवन (चावल को धोने के बाद निकाला गया पानी) से पीस कर बारीक चूर्ण बना ले, इसे नाक के रास्ते ले, इसके बाद गाय के घी को भी नाक के रास्ते ले, इससे सिर से सम्बंधित विकारो में आराम मिलता है। 

आप तंत्रिका-तंत्र सम्बन्धी परेशानियों के लिए दालचीनी के तेल को सिर पर लगाए, इससे फायदा होता है।

6-जुकाम में दालचीनी का इस्तेमाल - दालचीनी को पानी में घिस ले और गर्म कर लेऔर लेप के रूप में लगाए इससे जुकाम में फायदा होता है।  

दालचीनी का रस निकालकर सिर पर लेप करने से भी लाभ होता है।  

7-खांसी में फायदा - खांसी के इलाज के लिए दालचीनी का प्रयोग करना फायदेमंद होता है। खांसी से परेशान रहने वाले लोग आधा चम्मच दालचीनी के चूर्ण को 2 चम्मच मधु के साथ सुबह-शाम सेवन करे। इससे खांसी से आराम मिलता है।  

दालचीनी के पत्ते का काढ़ा बना ले। 10-20 मिग्रा० मात्रा में सेवन करने से खांसी ठीक होती है।  

एक चौथाई चम्मच दालचीनी के चूर्ण में 1 चम्मच मधु को मिला ले। इसे दिन में तीन बार सेवन करने से खांसी और दस्त में फायदा होता है। 

8-नाक के रोग में - दलचीनी 3.5 ग्रा० लौंग, 600 मिग्रा०, सौंठ 2 ग्रा०, को एक लीटर पानी में उबाल ले। जब यह पानी 250 मिली०,रह जाए, तो इसे छान ले इसको दिन में 3 बार लेने से नाक के रोग में लाभ होता है। आपको इसे 50 मिली की मात्रा में लेना है।  

9-पेट फूलने पर - पेट से सम्बंधित कई तरह के रोगो में दालचीनी बहुत ही फायदेमंद होती है। 5 ग्रा दालचीनी चूर्ण में 1 चम्मच मधु मिला ले इसे दिन में 3 बार सेवन करे। पेट के फूलने की बिमारी ठीक होती है।  

10-कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए  - जिन लोग के शरीर का वजन अधिक होता है, वे वजन को कम करने के लिए कई तरह के उपाय करते है। आप भी मोटापा कम करने में दालचीनी से फायदा ले सकते है।  एक कप पानी में 2 चम्मच मधु तथा तीन चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिला ले।  इसका रोजाना 3 बार सेवन करे। इससे कोलेस्ट्रॉल कम होता है। 

11-दस्त पर रोक लगाने के लिए -  5 ग्रा दालचीनी चूर्ण में 1 चम्मच मधु मिला ले। इसे दिन में 3 बार सेवन करे। इससे दस्त में फायदा होता है।  

750 मिग्रा दालचीनी के चूर्ण में 750 मिग्रा कत्था चूर्ण मिला ले इसे पानी के साथ दिन में तीन बार सेवन करे। इससे दस्त पर रोक लगती है। 

इसी तरह 4 ग्राम दालचीनी तथा 10 ग्राम कत्था को मिलाकर पीस ले। इसमें 250 मिग्रा खौलते हुए पानी में डालकर ढक दे। दो घंटे बाद इसे छानकर दो हिस्से करके पिए। इससे दस्त बंद हो जाते है।  

बेलगिरी के शरबत में 2-5 ग्रा दलचीनी का चूर्ण मिला ले। इसे सुबह-शाम पीने से दस्त की समस्या में लाभ होता है।  
12-आमाशय विकार में - दालचीनी इलायची और तेजपत्ता को बराबर-बराबर लेकर काढ़ा बना ले। इसके  सेवन से आमाशय की ऐठन ठीक होती है।  

13-आंतो के रोग में - आंतो को स्वस्थ रखने के लिए भी दालचीनी का इस्तेमाल करना अच्छा परिणाम देता है।  दालचीनी का तेल पेट पर मलने से आंतो का खिचाव दूर हो जाता है।  

14-चर्म रोग में - चर्म रोग को ठीक करने के लिए शहद एवं दालचीनी को मिलकर रोग वाले अंग पर लगाए। आप देखेंगे की थोड़े ही दिनों में खुजली-खाज, तथा फोड़े-फुंसी ठीक होने लगेंगे।  

15-बुखार में लाभ - 1 चम्मच शहद में 5 ग्राम दालचीनी का चूर्ण मिला ले, सुबह दोपहर और शाम को सेवन करने से ठंड के साथ आने वाला संक्रामक बुखार ठीक होता है।  

16-गठिया में लाभ - 10-20 ग्रा दालचीनी के चूर्ण को 20-30 ग्रा मधु में मिलाकर पेस्ट बना ले। इसे दर्द वाले स्थान पर धीरे-धीरे मालिश करे। इससे फायदा मिलेगा।  

नुक्सान - जैसे कोई भी चीज किसी के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन जरूरी नहीं की इससे सभी को फायदा मिले। दुसरे व्यक्ति को उससे हानि भी हो सकती है। इसी तरह दालचीनी के नुक्सान भी होते  है।  

दालचीनी का अधिक मात्रा में सेवन करने से सिरदर्द की शिकायत हो सकती है।  

दालचीनी गर्भवती स्त्रियों को नहीं देनी चाहिए, क्योंकि यह गर्भ को गिरा देती है।  
इसलिए दालचीनी के नुक्सान से बचने के लिए इस्तेमाल से पहले चिकित्सक से सलाह जरूर ले।  

उपयोगी भाग -  पत्ते, छाल, जड़
स्वाद बढ़ाने के लिए - दालचीनी के पत्ते और छाल के उपयोगी से केक, मिठाई और खाने का स्वाद बढ़ाया जाता है। दालचीनी का तेल इत्र, मिठाई और पेय में उपयोग किया जाता है। 

सावधानी - दालचीनी उष्ण गुणधर्म की है, इसलिए गर्मी के दिनों में कम उपयोग करे। 
                    दालचीनी  से पित्त बढ़ सकता है। 
                    उष्ण प्रकृति के लोग चिकित्सक से सलाह ले 


रविवार, 26 जुलाई 2020

विटामिन और उसके फायदे और उसकी कमी से होने वाले रोग












विटामिन या जीवन सत्त्व भोजन के अवयव है, जिनकी सभी जीवो को अल्प मात्रा में आवश्यकता होती है। रासायनिक रूप से ये कार्बनिक यौगिक को विटामिन कहा जाता है, जो शरीर द्वारा पर्याप्त मात्रा में स्वयं उत्पन्न नहीं किया जा सकता बल्कि भोजन के रूप में लेना आवश्यक है। विटामिन्स का सेवन शरीर के उचित विकास  और अन्य कार्यो की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण है, दरअसल विटामिन्स का मुख्यकार्य भोजन को ईंधन में बदलना है, जिससे शरीर में खाया हुआ ठीक से पच सके, और शरीर को सही रूप में एनर्जी मिल सके जो शरीर के कार्यो को प्रभावी ढंग से करने के लिए आयश्यक है। 


विटामिन A -आँखों से देखने के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। साथ ही यह संक्रामक रोगो से बचाता है। यह विटामिन शरीर में अनेक अंगो को सामान्य रूप में बनाये रखने में मदद करता है। जैसे की त्वचा, बाल, नाखून ग्रंथि, दांत, मसूड़ और हड्डी।


विटामिन A के स्रोत -

 ताजे फल, दूध, मांस, अंडा, मछली का तेल, गाजर, मक्खन, हरी सब्जियों, पनीर, पीले रंग के फल, चुकंदर आदि में होता है।


विटामिन A की कमी से होने वाले रोग -

सबसे महत्वपूर्ण स्थिति जो की सिर्फ विटामिन A के अभाव में होती है। वह है अँधेरे में कम दिखाई देना, जिसे रतौंधी कहते है, इसके साथ आँखों में आंसुओं की कमी से आँखे सूख जाती है, और उनमे घाव भी हो सकते है। बच्चों में विटामिन ए के अभाव में विकास भी धीमा हो जाता है। जिससे की उनके कद पर असर पड़ सकता है। त्वचा और बालो में भी सूखापन हो जाता है, और उनमे से चमक चली जाती है। संक्रमित बिमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।


विटामिन B 

विटामिन B शरीर को जीवन शक्ति देने के लिए अति आवश्यक होता है। इस विटामिन की कमी से शरीर अनेक रोगो का घर बन जाता है। विटामिन B के कई विभागों की खोज की जा चुकी है। ये सभी विभाग मिलकर ही विटामिन बी काम्प्लेक्स कहलाते है। हालांकि सभी विभाग एक दुसरे के अभिन्न अंग है. लेकिन फिर भी सभी आपस में भिन्नता रखते है। विटामिन बी काम्प्लेक्स १२० डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी सहन करने की छमता रखते है। उससे अधिक ताप यह सहन नहीं कर पाता और नष्ट हो जाता है। यह विटामिन पानी में घुलशील होता है इसके प्रमुख कार्य स्नायुओं को स्वस्थ रखना तथा भोजन के पाचन में सक्रिय योगदान देना होता है। क्षार पदार्थो के संयोग से यह बिना किसी ताप के नष्ट हो जाता है, पर अम्ल के साथ उबाले जाने पर भी नष्ट नहीं होता है।


विटामिन बी के स्रोत  - 

 विटामिन बी काम्प्लेक्स के श्रोतो में टमाटर, भूसीदार गेहू का आटा, अंडे की जर्दी, हरी पत्तियों का साग, बादाम, अखरोट, बिना पालिश किया चावल, पौधों के बीज, सुपारी, नारंगी, अंगूर, दूध ताजे सेम, ताजे मटर, दाल, जिगर, वनस्पति, साग-सब्जी, आलू, मेवा, खमीर, नारियल, पिस्ता, ताजे फल, दही, पालक, बंदगोभी, मछली, अंडे की सफेदी, माल्टा, चावल की भूसी, फलदार सब्जी आदि आते है।


विटामिन बी की कमी से होने वाले रोग -

हाथ पैरो की उंगलियों में सनसनाहट होना, मष्तिष्क की स्नायु में सूजन व् दोष होना, पैर ठन्डे व गीले होना, सर के पिछले भाग में स्नायु दोष हो जाना, मांसपेशियों का कमजोर होना, हाथ पैरो के जोड़ अकड़ना, शरीर का वजन घट जाना, नींद कम आना, शरीर पर लाल चकत्ती निकलना, दिल कंमज़ोर होना, शरीर में सूजन आना, सर चकराना, नजर कमजोर होना, पाचनक्रिया खराब होना।


विटामिन C -

विटामिन सी को एस्कार्बिक एसिड के नाम से भी जाना जाता है। यह शरीर की कोशिकाओं को बाँध के रखता है। इससे शरीर के विभिन्न अंगो को आकार बनाने में मदद मिलता है। यह शरीर के ब्लड वेस्स्ल या खून की नसों को मजबूत बनाता है। इसके एंटीहिस्टमीन गुणवत्ता के कारण यह सामान्य सर्दी-जुकाम में दवा का काम कर सकता है।


विटामिन सी के स्रोत -

विटामिन सी के अच्छे स्रोत है नारंगी जैसे फल या सिट्रस फ्रूट्स जैसे अंगूर, टमाटर, अमरुद, सेब, बेर, स्ट्राबेरी


विटामिन C  की कमी से होने वाले रोग -

 इसके अभाव में मसूड़ो से खून बेहता है, दाँत दर्द हो सकता है, दांत ढीले हो सकते है या निकल सकते है त्वचा या चर्म में भी चोट लगने पर अधिक खून बह सकता है, रूखा हो सकता है। आपको भूंख कम लगेगी, बहुत अधिक विटामिन के अभाव से स्कर्वी रोग हो सकता है। विटामिन सी की कमी से शरीर का वजन कम हो जाता है।


विटामिन D -

यह शरीर की हड्डियों को बनाने और संभाल कर रखने में मदद करता है, साथ ही यह शरीर में कैल्सियम के स्तर को नियंत्रित रखता है।


विटामिन D के स्रोत -

अंडे का पीला भाग, मछली का तेल, सोयाबीन, दूध और बटर इसके अच्छे स्रोत है। इसके अलावा धूप सेकने से भी शरीर में इसका निर्माण होता है।


विटामिन D की कमी से होने वाले रोग -

 इसके अभाव में हड्डियाँ कमजोर हो जाती है, और टूट भी सकती है। बच्चो में इस स्थिति को रिकेट्स और व्यस्क लोगो में हड्डी के मुलायम होने को ऑस्टियोमलेशिया कहते है। इसके अलावा हड्डी के पतला और कमजोर होने को ऑस्टियोपोरोसिस कहते है।


विटामिन E -

विटामिन ई खून में रेड ब्लड सेल्स या लाल रक्त कोशिका को बनाने के काम आता है। इसे टोकोफेराल भी कहते है। यह विटामिन शरीर में अनेक अंगो को सामान्य रूप में बनाये रखने में मदद करता है। जैसे की मांसपेशिया, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मजबूत शरीर को एलर्जी से बचाये रखने, कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित रखने एवं अन्य टिशू या उत्तक। यह शरीर को ऑक्सीज़न के एक नुकसानदायक रूप से बचाता है, जिसे ऑक्सीज़न रेडिकल्स कहते है।  इस गुण को एंटीऑक्सीडेंट कहा जाता है। विटामिन ई कोशिका के अस्तित्व बचाये रखता है, उनके बाहरी कवच या सेल्स मेम्ब्रेन को बनाये रखता है। विटामिन ई शरीर के फैटी एसिड को भी संतुलन में रखता है।


विटामिन E के स्रोत -

अंडे, सूखे मेवे, बादाम, अखरोट, सूरजमुखी के बीज, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, शकरकंद इसके अलावा विटामिन E वनस्पति तेल, गेहू, हरी साग, चना, जौ, खजूर, चावल के मांड,सरसों  में पाया जाता है।  


विटामिन E की कमी से होने वाले रोग -

जननशक्ति का कम होना


विटामिन K -

वसा में घुलनशील विटामिन है, तथा रक्त का धक्का जमाव के लिए अत्याआयश्यक होता है। रक्त का थक्का जमना मनुष्य के शरीर की एक विशिष्ट क्रिया है। यदि रक्त का थक्का न बने तो चोट लगने पर अत्यधिक रक्त स्त्राव के कारण व्यक्ति की मृत्यु भी संभव है, तथा कभी-कभी रक्त का थक्का बनना जानलेवा भी हो जाता है।  जैसे-मस्तिष्क में ब्लड क्लॉटिंग कई बार व्यक्ति को लकवाग्रस्त भी बना देती है।लीवर में विटामिन के द्वारा कुछ प्रकार के प्रोटीन्स जैसे-प्रोथ्रॉम्बिन तथा फाइब्रिनोजेन का पूर्ण संश्लेषण होता है। जो की रक्त का थक्का जमाने में सहायक होते है। ये संश्लेषित प्रोटीन रक्त में उपस्थित होते है, तथा जब शरीर में किसी प्रकार की चोट लगती है, तब ये प्रोथ्रॉम्बिन में परिवर्तित होकर रक्त का थक्का जमाते है। ब्लड प्लाज्मा में घुलनशील प्रोटीन फाइब्रिनोजन पाया जाता है.जो चोट लगने पर चोटिल स्थान पर थ्रोम्बिन तथा थ्रोम्बोप्लास्टिन के साथ मिलकर फाइब्रिन नामक जाल के सामान संरचना बनाती है।  जिसमे ब्लॉउड प्लाज्मा तथा कोशिकाएं फस जाती है। तथा इस प्रक्रिया को ही थक्का बनना कहते है। अतः स्पष्ट है कि विटामिन के शरीर में दो तरह से काम करता है, शरीर के अंदर ब्लड को जमने नहीं देता और शरीर के बाहर ब्लड को बहने नहीं देता।


विटामिन K के स्रोत -

सरसो के साग, पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, हरे पत्तेदार सब्जियां, पालक, धनिया, सूखे मेवे, नट्स, अंजीर,  किशमिश, बादाम, मछली, यकृत, मटन, अंडे, दूध तथा दूध से बने पदार्थ


विटामिन की कमी से होने वाले रोग -

रक्त का  थक्का न जमना

मंगलवार, 14 जुलाई 2020

इम्युनिटी और काढ़ा

कोरोना काल में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा बताये गए हर्बल चाय और काढ़ा बनाने की सामग्री और विधि 


इस समय पूरी दुनिया में कोरोना महामारी का प्रकोप है, और पूरी दुनिया इस महामारी की वजह से अपने घरो में बंद होने को मजबूर है, क्योकि कोरोना दिन प्रतिदिन अपने पैर पसार रहा है। यह महामारी अंकगणितीय रूप में फ़ैल रहा है। यह प्रतिदिन अपनी महामारी रुपी आतंक दुनिया के कोने-कोने में फ़ैला रहा है, और सभी इस महामारी से परेशान है, क्योंकि एक तरफ जहाँ इस महामारी से लोग मर रहे है, तो दूसरी तरफ सभी प्रकार के काम-काज भी बंद है और लोग इससे छुटकारा पाना चाहते है,और इससे छुटकारा पाने के कई उपाय है। जिसमे सबसे मुख्य है इम्युनिटी क्योकि इम्युनिटी हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक छमता बढ़ाती है। जो हमें इस महामारी से बचाये रखने में मदद करती है। इसलिए आयुष मंत्रालय ने भी हमें इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए काढ़ा और हर्बल चाय पीने की सलाह दी है, और आयुष मंत्रालय द्वारा दी गयी काढ़ा और हर्बल चाय की सामग्री और उनके बनाने की विधि के बारे में आज हम बात करेंगे -

तो आइये देखते है-


आयुष मंत्रालय द्वारा बताये गए हर्बल चाय और काढ़ा की सामग्री और उसे बनाने की विधि -


हर्बल चाय-                                                                                                                                               
काढ़े को लेकर आयुष मंत्रालय का कहना है कि इस हर्बल काढ़े का सेवन करने से कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है, उन्होंने कहा कि हर्बल काढ़ा में 4 औषधीय जड़ी बूटियों का समावेश किया गया है, जो भारतीय रसोई में आसानी से उपलब्ध होता है। 


इन चीजों से बनाये काढ़ा -
                                          इस आयुष काढ़े को घर में आराम से बनाया जा सकता है, जिसके लिये आपको  इन चीजों की जरूरत होगी।

1 .तुलसी का पत्ता-4
2 . दालचीनी छाल के दो टुकड़े
3 .सोंठ -2 टुकड़े
4 .काली मिर्च -1
5 .मुनक्का -4 


काढा बनाने की विधि -
यह काढ़ा बनाने के लिए तुलसी,दालचीनी,कालीमिर्च,अदरक या सोंठ, और मुनक्का को एक साथ पानी में उबाल ले और छानकर इस पानी का सेवन करे, इस काढ़े का सेवन दिन में दो बार कर सकते है, अगर इस काढ़े को  पीने में स्वाद में कोई परेशानी आये तो आप इसमें गुड़ या नीबू का रस मिला सकते है।

आयुष मंत्रालय ने सलाह दी है, कि सूखी खांसी या गले में सूजन के लिए दिन में एक या दो बार पुदीने की ताजा पत्तिया अजवाइन के साथ ले सकते है। गले में खराश के लिए दिन में दो या तीन बार प्राकृतिक शक्कर या शहद के साथ लौंग का पाउडर लेने के लिए भी आयुष मंत्रालय ने सलाह दी है।  

https://www.instagram.com/yegoodhealth/
https://www.facebook.com/yegoodhealth

रविवार, 12 जुलाई 2020

उपवास

उपवास एक तरह से हमारे शरीर के लिए दवा का  काम करता है, यह हमारे दिमाग को शांत और मन को प्रसन्न रखता ही है, साथ-साथ बढ़ते उम्र के साथ होने वाली नई-नई बीमारियों को भी दूर रखता है। 



यहाँ अक्सर सभी लोग उपवास को धर्म से जोड़कर देखते है, परन्तु ऐसा नहीं है उपवास का धार्मिक लाभ तो है ही इसके साथ-साथ यह हमारे सेहत को भी ठीक रखता है। इस समय बारिश का मौसम भी आ चुका है, और कोरोना महामारी भी फ़ैल रहा है, ऐसे में हम सभी को अपने सेहत को ठीक रखने के लिये सप्ताह में एक या दो दिन उपवास रखना चाहिए। 



 शोध के अनुसार 
                            यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ कैलिफोर्निया का शोध कहता है, कि उपवास करने से फैट तेजी से बर्न होता है, और मोटापा कण्ट्रोल करने में भी सहायता मिलती है। मोटापा और भी बीमारियों का एक मुख्य कारण है। जैसे -बैड कोलेस्ट्रोल का बढ़ना, ब्लड प्रेशर, डयबिटीज, दिल सम्बन्धी बिमारी, आदि बीमारियों का कारन है। व्रत रखने से बढ़ते वजन को रोकने में भी मद्दद मिलती है और बीमारियां भी काम होती है। उपवास रखने से नई रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं के बनने में सहायता होती है। शरीर के अंदर की गन्दगी को साफ करने में और पाचन क्रिया को ठीक रखने के लिए आप अपनी सुविधानुसार कभी भी उपवास कर सकते है। कई अध्ययन में यह पाया गया है कि कुछ समय के लिए उपवास से मेटाबोलिक रेट में 3 से 4 फीसदी तक बढ़ोत्तरी होती है। उपवास रखने से दिमाग भी स्वस्थ रहता है। उपवास रखने से डिप्रेसन और दिमाग से जुडी कई समस्याओं में लाभ होता है, उपवास करने से तनाव में भी फायदा होता है।



सेहत को ठीक रखने में उपयोगी उपवास -
                                                                   हमारे शरीर के पाचन तंत्र सिस्टम को भी थोड़ा आराम की जरूरत होती है, क्योकि लगातार काम करते हुए हमारा पाचन तंत्र भी खराब हो सकता है। पाचन तंत्र को आराम देने का सबसे अच्छा उपाय है, व्रत करना। जब हम कुछ भी खाते है, तो हमारे पूरे पाचन तंत्र को काम करना पड़ता है, विशेषतः लिवर और किडनी को ज्यादा काम करना पड़ता है। व्रत करने का सबसे ज्यादा फायदा हमारे शरीर को यह है कि इसको ज्यादा काम नहीं करना पड़ता है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन का एक शोध कहता है, यदि आप बीमारियों से बचना चाहते है, और वृद्धावस्था में भी सेहतमंद रहना चाहते है, तो व्रत करना आपके लिए लाभकारी हो सकता है, व्रत करने से आपके शरीर की चयापचय प्रक्रिया पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है, और बढ़ती उम्र की बीमारियों को दूर रखने में मदद मिलती है। कुछ भी न खाने से शरीर में सिरकेडियन क्लॉक और व्रत संचालित कोशिकीय प्रतिक्रियाओं पर असर पड़ता है। यदि नियमित व्रत रखा जाए तो हमारे शरीर की कोशिकीय प्रणाली पर सकारात्मक लाभ होगा, जो अतंतः हमारे स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव डालता है, और नई बीमारियों से भी बचाता है।



उपवास के फायदे अनेक -
                                          हफ्ते में कम से कम दो दिन दिन व्रत अवश्य रखना चाहिए, क्योकि व्रत रखने से जब हम कुछ भी नहीं  खाते है, तो शरीर में फैट सेल्स लैप्टिन नाम के हारमोन का स्त्राव होता है, जो हमारे वजन को कम रखने में सहायक होता है। विशेषज्ञो की माने तो कीमोथेरेपी कराने वाले मरीजो के लिए व्रत रखना बहुत फायदेमंद होता है। जब हम एक दिन का व्रत रखते है, तब  कुछ भी न खाने की वजह से हमारे शरीर की गन्दगी बाहर आती है, और शरीर की सफाई हो जाती है, और हमारा पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। उपवास करने से मेटाबोलिक रेट में 3 से 14 फीसदी तक बढ़ोत्तरी होती है। उपवास रखने से दिमाग भी स्वस्थ रहता है, डिप्रेसन और दिमाग से जुडी कई समस्याओं में लाभ होता है, जब आप उपवास करते है। तो इस समय शरीर में जमा चर्बी तेजी से गलना शुरू होता है, और मोटापा भी कम होता है। उपवास करने से नई रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं के बनने में मदद मिलती है।  
                                                                                          

गुरुवार, 9 जुलाई 2020

वर्षा ऋतु जितना सुहावना और खुशनुमा मौसम होता है, उतना ही यह मौसम अपने साथ बीमारियां भी लाता है,अतः हमें इस मौसम का आनंद लेने के साथ ही अपने आपको सुरक्षित भी रखने का ध्यान रखना चाहिए।



                                                                                                                                                                                                                                                                               
जैसा की हम जानते है, बरसात का मौसम आ चुका है, और बारिश हो रही है और धूप भी बहुत तेज हो रही है, जिससे गर्मी भी बहुत तेज है, और धूप की वजह से उमस है, और बरसात से गर्मी भी है। जिससे बीमारियां भी होने की बहुत संभावना रहती है। अतः इस मौसम में हमें अपने स्वास्थय की देख-भाल करने की जरूत है। जिससे बारिश से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके।  जैसे- जलजनित रोग, पेट से सम्बंधित बीमारियों, दूषित रक्त से चर्म रोग तथा मलेरिया, पेचिश आदि रोग हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालते है।
                                                                                                                                   


वर्षा ऋतु आ चुका है, और हम सभी के जीवन में एक नया संचार पैदा करता है। एक तरफ जहां इसका सुहावना मौसम गर्मी से राहत देता है। वही दूसरी तरफ स्वास्थय सम्बन्धी समस्याएं भी पैदा करता है। इस मौसम में प्रमुख जलजनित रोग हमारे स्वास्थय विपरीत प्रभाव डालते है। और हमें बीमार करते है। अतः आवश्यक है कि हम इस मौसम में सावधानी बरते, जिससे इस मौसम का आनंद उठाने के साथ-साथ हम स्वस्थ रह सके।  



  तो आइये देखते है। इससे सम्बंधित कुछ टिप्स                                                                                                                                                          
                                                                     बारिश के मौसम में पानी के दूषित होने की बहुत संभावना रहती है। इसलिए सभी को पानी को उबालकर ही पीना चाहिए और सभी के घरो में वाटर फिल्टर अवश्य होना चाहिए।  
                                                                           

     वर्षा ऋतु में वायु विकार अधिक कष्टकारी होता है। इसलिए सुबह उठने के पश्चात दिन की शुरूआत एक गिलास गुनगुने पानी में नीबू का रस और शहद दोनों दो से चार चम्मच डालकर पीने से पेट साफ रहता है, और पाचन शक्ति भी ठीक रहता है।                           
                                                                                                                       


 बारिश के मौसम में कीचड़ और पानी के कारण नंगे पैर नहीं टहलना चाहिए। सुबह और शाम को सैर करने वालो को पार्क और घर पर टहलने में सावधानी बरतनी चाहिए।


                                                 
 पेट की गड़बड़ी में खान-पान का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए ध्यान रखे कि बारिश के मौसम में बासी भोजन तथा बाज़ार में बिकने वाले खुले खाद्य पदार्थो का सेवन न करे।



                                                                             
                                                                      बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। अतः मलेरिया से बचाव के लिए तुलसी की चाय, या फिर अदरक और बड़ी इलायची की चाय बरसात के विकारो से बचाने में सहयोगी हैं।
                                                                   
                                    बारिश के मौसम में कपड़ो को धूप दिखाते रहना चाहिए और कपड़ो को पहनते समय झटककर और देखकर ही पहनना चाहिए, जिससे उसमे कोई बरसाती कीड़ा छुपा न रह जाए।


                                               
  भोजन गर्म और हल्का तथा सुपाच्य ही लेना चाहिए, अदरक,पुदीना,नीबू और हरी मिर्च आदि का प्रयोग इस मौसम में अवश्य करना चाहिए।


                                                                                         
       जिन स्थानों पर कूड़ा-करकट जमा होकर सड़ता हो और कीचड़ अधिक हो उन स्थानों को साफ रखने का प्रयास करे तथा पालतू जानवरो से होने वाली गन्दगी को साफ करते रहना चाहिए।   
                     
 https://www.facebook.com/yegoodhealth
 https://www.facebook.com/yegoodhealth                                 

मंगलवार, 7 जुलाई 2020

सैनिटाइज़र का उपयोग संभलकर करे

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए हाथों को सैनिटाइज़र से साफ़ करना जरूरी होता है तीन महीने से इसका इस्तेमाल कर रहे लोगों की आदत में यह शामिल हो गया है लोग बार-बार हैंडसैनिटाइज़र का इस्तेमाल कर रहे है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका अधिक व् बिना जरूरत इस्तेमाल त्वचा, पेट के रोग पैदा कर सकता है, डॉ. सैनिटाइज़र के फायदे-नुकशान बताते हुए कहते हैं |  कि कोरोना की दस्तक से पहले सैनिटाइज़र के बारे में आम तौर पर डॉक्टर ही जानते थे।
                                              वह मरीज देखने के बाद, आपरेशन करने के पहले व् बाद में अपने हाथ आपरेशन करने के पहले व् बाद में अपने हाथ सैनिटाईज़ करते थे। कोरोना काल की शुरुआत में तो सैनिटाइज़र दुरलभ जड़ी-बूटी की तरह हो गया था।  आसानी से मिल ही नहीं रहा था।  हालांकि अब हर दूकान पर कई रेट,   साइज व् सुगंध में उपलब्ध है। इसके इस्तेमाल का सही तरीका व् गुणवत्ता न जानने के चलते बहुत से लोग अपने को खतरे में डाल रहे है।
            पेट में जाने से खतरा :
                                              सैनिटाइज़र में अलकोहल की मात्रा ज्यादा होती है। इसे हाथो पर लगाने के बाद उसी हाथ से तमाम लोग नाश्ता, भोजन कर लेते है। ऐसा करना उनकी सेहत पर गंभीर ख़तरा उत्पन्न कर सकता है।  दरअसल हैंड सैनिटाइज़र में कई प्रकार के केमिकल्स मिले होते है। कीटाणुओ को नष्ट करने के लिए अलकोहल की मात्रा होती है।  ऐसे में फूड प्वाजनिंग  हो सकती है।
                                             मानव शरीर में अच्छे और नुक्सानदायक दोनों प्रकार के बैक्टेरिया पाए जाते है। हाथों पर भी कुछ अच्छे बैक्टीरिया होते है।  ऐसे में कोरोना के डर से लगातार सैनिटाइज़र से हाथ साफ करने के कारण हाथों पर मौजूद लाभकारक बैक्टीरिया भी मर जाते है।  
https://www.facebook.com/yegoodhealth
https://www.instagram.com/yegoodhealth/

शनिवार, 4 जुलाई 2020

इम्युनिटी बढ़ाने के उपाय

            इस वैश्विक कोरोना महामारी से बचने के लिए अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाये रखने की जरूत है जिससे हम स्वयं को और अपने परिवार और अपने समाज स्वस्थ बनाये रख सके  

कोरोना वायरस ने इस समय पूरी दुनिया में आतंक मचा रखा है और यह भी सत्य है कि  कोरोना वायरस अंतिम वायरस नहीं है और भी कई जानलेवा वायरस आएंगे जरूरी है,कि आप अपनी  इम्युनिटी बढ़ाये और खुद को अंदर से मजबूत बनाये जिससे आप जल्दी बीमार न पड़े और आप स्वयं को और अपने परिवार और समाज को स्वस्थ बनाये रखे तो आज हम अपनी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कुछ उपाय के बारे में जानेंगे जो हमें अपने घरो में या अपने आसपास बड़ी ही आसानी से मिल जाते है |


१.गिलोय का रस या काढ़ा - 
                                           गिलोय के तने को चार इंच लम्बाई में काट ले और उसे छोटे-छोटे टुकड़ो में काट ले और पीस कर पेस्ट बना ले फिर चार  कप पानी में एक चौथाई चम्मच हल्दी के साथ  को उबाल ले यह ध्यान रखे की ढक कर नहीं उबालना है ,और जब उबलते हुए एक कप बच जाए तो एक चुटकी काली मिर्च मिलाकर सुबह खाली पेट पीना है


२.नीबू -
             नीबू में विटामिन सी पाया जाता है ,अतः आप प्रतिदिन नीबू पानी का सेवन करे और इससे आपके शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होगा   | 


३ .सेब का सिरका और लहसुन -
                                                  सेब के सिरके में भीगी हुई लहसुन की २ कालिया एक दिन छोडकर ले सेब का सिरका और लहसुन दोनों  ही इम्यूनोमोडुलेटर होते है, इसलिए यह इम्युनिटी बढ़ाने का बड़ा आसान उपाय है | 


४ . हल्दी पाउडर और शहद -
                                           आधा चम्मच हल्दी पाउडर और उसमे  शहद मिलाकर  रोजाना सोते समय दूध  से ले इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए हल्दी बहुत उपयोगी है शहद  भी इम्यूनोमोडुलेटर है , यह इम्युनिटी बढ़ाने के लिए एक आसान उपाय है


५ . धूप -
            धूप से बेहतरीन और मुफ़्त का इम्युनिटी बूस्टर कोई और नहीं है ,यह  विटामिन ही का स्रोत है जो कि इम्युनिटी के लिए जिम्मेदार विटामिन  में से एक है रोजाना कम से कम ३० मिनट धूप में बिताये यह आपको शक्ति और ऊर्जा से भर देगी  | 



६ .आंवला पाउडर और शहद -
                                             आधा चम्मच आंवला पाउडर लीजिये और उसमे शहद मिलाकर रोजाना सुबह ले आंवला विटामिन सी का सर्वश्रेष्ट स्रोत है ,और विटामिन सी इम्युनिटी का चमत्कारी ढंग से बढ़ाने के लिए मशहूर है | 


७ .इबादत -
                 जब समय मिले आप ध्यान प्रार्थना  या इबादत करे जब मन शांत और भय मुक्त रहता है तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है यह सबसे आसान और कारगर इम्युनिटी बूस्टर है |