हम सभी के लिए स्वास्थ्य बहुत महत्वपूर्ण है, आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम सभी अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना अपना काम करते रहते हैं, और हमें पता भी नहीं चलता कि कब हमारा स्वास्थ्य बिगड़ जाता हैं । इसलिए मैंने यह ब्लॉग YEGOODHEALTH बनाया। जिसमें आप सभी को आपके स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण लेख मिलेंगे, जिन्हें पढ़कर आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं।
रविवार, 26 जुलाई 2020
विटामिन और उसके फायदे और उसकी कमी से होने वाले रोग
विटामिन या जीवन सत्त्व भोजन के अवयव है, जिनकी सभी जीवो को अल्प मात्रा में आवश्यकता होती है। रासायनिक रूप से ये कार्बनिक यौगिक को विटामिन कहा जाता है, जो शरीर द्वारा पर्याप्त मात्रा में स्वयं उत्पन्न नहीं किया जा सकता बल्कि भोजन के रूप में लेना आवश्यक है। विटामिन्स का सेवन शरीर के उचित विकास और अन्य कार्यो की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण है, दरअसल विटामिन्स का मुख्यकार्य भोजन को ईंधन में बदलना है, जिससे शरीर में खाया हुआ ठीक से पच सके, और शरीर को सही रूप में एनर्जी मिल सके जो शरीर के कार्यो को प्रभावी ढंग से करने के लिए आयश्यक है।
विटामिन A -आँखों से देखने के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। साथ ही यह संक्रामक रोगो से बचाता है। यह विटामिन शरीर में अनेक अंगो को सामान्य रूप में बनाये रखने में मदद करता है। जैसे की त्वचा, बाल, नाखून ग्रंथि, दांत, मसूड़ और हड्डी।
विटामिन A के स्रोत -
ताजे फल, दूध, मांस, अंडा, मछली का तेल, गाजर, मक्खन, हरी सब्जियों, पनीर, पीले रंग के फल, चुकंदर आदि में होता है।
विटामिन A की कमी से होने वाले रोग -
सबसे महत्वपूर्ण स्थिति जो की सिर्फ विटामिन A के अभाव में होती है। वह है अँधेरे में कम दिखाई देना, जिसे रतौंधी कहते है, इसके साथ आँखों में आंसुओं की कमी से आँखे सूख जाती है, और उनमे घाव भी हो सकते है। बच्चों में विटामिन ए के अभाव में विकास भी धीमा हो जाता है। जिससे की उनके कद पर असर पड़ सकता है। त्वचा और बालो में भी सूखापन हो जाता है, और उनमे से चमक चली जाती है। संक्रमित बिमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।
विटामिन B
विटामिन B शरीर को जीवन शक्ति देने के लिए अति आवश्यक होता है। इस विटामिन की कमी से शरीर अनेक रोगो का घर बन जाता है। विटामिन B के कई विभागों की खोज की जा चुकी है। ये सभी विभाग मिलकर ही विटामिन बी काम्प्लेक्स कहलाते है। हालांकि सभी विभाग एक दुसरे के अभिन्न अंग है. लेकिन फिर भी सभी आपस में भिन्नता रखते है। विटामिन बी काम्प्लेक्स १२० डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी सहन करने की छमता रखते है। उससे अधिक ताप यह सहन नहीं कर पाता और नष्ट हो जाता है। यह विटामिन पानी में घुलशील होता है इसके प्रमुख कार्य स्नायुओं को स्वस्थ रखना तथा भोजन के पाचन में सक्रिय योगदान देना होता है। क्षार पदार्थो के संयोग से यह बिना किसी ताप के नष्ट हो जाता है, पर अम्ल के साथ उबाले जाने पर भी नष्ट नहीं होता है।
विटामिन बी के स्रोत -
विटामिन बी काम्प्लेक्स के श्रोतो में टमाटर, भूसीदार गेहू का आटा, अंडे की जर्दी, हरी पत्तियों का साग, बादाम, अखरोट, बिना पालिश किया चावल, पौधों के बीज, सुपारी, नारंगी, अंगूर, दूध ताजे सेम, ताजे मटर, दाल, जिगर, वनस्पति, साग-सब्जी, आलू, मेवा, खमीर, नारियल, पिस्ता, ताजे फल, दही, पालक, बंदगोभी, मछली, अंडे की सफेदी, माल्टा, चावल की भूसी, फलदार सब्जी आदि आते है।
विटामिन बी की कमी से होने वाले रोग -
हाथ पैरो की उंगलियों में सनसनाहट होना, मष्तिष्क की स्नायु में सूजन व् दोष होना, पैर ठन्डे व गीले होना, सर के पिछले भाग में स्नायु दोष हो जाना, मांसपेशियों का कमजोर होना, हाथ पैरो के जोड़ अकड़ना, शरीर का वजन घट जाना, नींद कम आना, शरीर पर लाल चकत्ती निकलना, दिल कंमज़ोर होना, शरीर में सूजन आना, सर चकराना, नजर कमजोर होना, पाचनक्रिया खराब होना।
विटामिन C -
विटामिन सी को एस्कार्बिक एसिड के नाम से भी जाना जाता है। यह शरीर की कोशिकाओं को बाँध के रखता है। इससे शरीर के विभिन्न अंगो को आकार बनाने में मदद मिलता है। यह शरीर के ब्लड वेस्स्ल या खून की नसों को मजबूत बनाता है। इसके एंटीहिस्टमीन गुणवत्ता के कारण यह सामान्य सर्दी-जुकाम में दवा का काम कर सकता है।
विटामिन सी के स्रोत -
विटामिन सी के अच्छे स्रोत है नारंगी जैसे फल या सिट्रस फ्रूट्स जैसे अंगूर, टमाटर, अमरुद, सेब, बेर, स्ट्राबेरी
विटामिन C की कमी से होने वाले रोग -
इसके अभाव में मसूड़ो से खून बेहता है, दाँत दर्द हो सकता है, दांत ढीले हो सकते है या निकल सकते है त्वचा या चर्म में भी चोट लगने पर अधिक खून बह सकता है, रूखा हो सकता है। आपको भूंख कम लगेगी, बहुत अधिक विटामिन के अभाव से स्कर्वी रोग हो सकता है। विटामिन सी की कमी से शरीर का वजन कम हो जाता है।
विटामिन D -
यह शरीर की हड्डियों को बनाने और संभाल कर रखने में मदद करता है, साथ ही यह शरीर में कैल्सियम के स्तर को नियंत्रित रखता है।
विटामिन D के स्रोत -
अंडे का पीला भाग, मछली का तेल, सोयाबीन, दूध और बटर इसके अच्छे स्रोत है। इसके अलावा धूप सेकने से भी शरीर में इसका निर्माण होता है।
विटामिन D की कमी से होने वाले रोग -
इसके अभाव में हड्डियाँ कमजोर हो जाती है, और टूट भी सकती है। बच्चो में इस स्थिति को रिकेट्स और व्यस्क लोगो में हड्डी के मुलायम होने को ऑस्टियोमलेशिया कहते है। इसके अलावा हड्डी के पतला और कमजोर होने को ऑस्टियोपोरोसिस कहते है।
विटामिन E -
विटामिन ई खून में रेड ब्लड सेल्स या लाल रक्त कोशिका को बनाने के काम आता है। इसे टोकोफेराल भी कहते है। यह विटामिन शरीर में अनेक अंगो को सामान्य रूप में बनाये रखने में मदद करता है। जैसे की मांसपेशिया, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मजबूत शरीर को एलर्जी से बचाये रखने, कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित रखने एवं अन्य टिशू या उत्तक। यह शरीर को ऑक्सीज़न के एक नुकसानदायक रूप से बचाता है, जिसे ऑक्सीज़न रेडिकल्स कहते है। इस गुण को एंटीऑक्सीडेंट कहा जाता है। विटामिन ई कोशिका के अस्तित्व बचाये रखता है, उनके बाहरी कवच या सेल्स मेम्ब्रेन को बनाये रखता है। विटामिन ई शरीर के फैटी एसिड को भी संतुलन में रखता है।
विटामिन E के स्रोत -
अंडे, सूखे मेवे, बादाम, अखरोट, सूरजमुखी के बीज, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, शकरकंद इसके अलावा विटामिन E वनस्पति तेल, गेहू, हरी साग, चना, जौ, खजूर, चावल के मांड,सरसों में पाया जाता है।
विटामिन E की कमी से होने वाले रोग -
जननशक्ति का कम होना
विटामिन K -
वसा में घुलनशील विटामिन है, तथा रक्त का धक्का जमाव के लिए अत्याआयश्यक होता है। रक्त का थक्का जमना मनुष्य के शरीर की एक विशिष्ट क्रिया है। यदि रक्त का थक्का न बने तो चोट लगने पर अत्यधिक रक्त स्त्राव के कारण व्यक्ति की मृत्यु भी संभव है, तथा कभी-कभी रक्त का थक्का बनना जानलेवा भी हो जाता है। जैसे-मस्तिष्क में ब्लड क्लॉटिंग कई बार व्यक्ति को लकवाग्रस्त भी बना देती है।लीवर में विटामिन के द्वारा कुछ प्रकार के प्रोटीन्स जैसे-प्रोथ्रॉम्बिन तथा फाइब्रिनोजेन का पूर्ण संश्लेषण होता है। जो की रक्त का थक्का जमाने में सहायक होते है। ये संश्लेषित प्रोटीन रक्त में उपस्थित होते है, तथा जब शरीर में किसी प्रकार की चोट लगती है, तब ये प्रोथ्रॉम्बिन में परिवर्तित होकर रक्त का थक्का जमाते है। ब्लड प्लाज्मा में घुलनशील प्रोटीन फाइब्रिनोजन पाया जाता है.जो चोट लगने पर चोटिल स्थान पर थ्रोम्बिन तथा थ्रोम्बोप्लास्टिन के साथ मिलकर फाइब्रिन नामक जाल के सामान संरचना बनाती है। जिसमे ब्लॉउड प्लाज्मा तथा कोशिकाएं फस जाती है। तथा इस प्रक्रिया को ही थक्का बनना कहते है। अतः स्पष्ट है कि विटामिन के शरीर में दो तरह से काम करता है, शरीर के अंदर ब्लड को जमने नहीं देता और शरीर के बाहर ब्लड को बहने नहीं देता।
विटामिन K के स्रोत -
सरसो के साग, पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, हरे पत्तेदार सब्जियां, पालक, धनिया, सूखे मेवे, नट्स, अंजीर, किशमिश, बादाम, मछली, यकृत, मटन, अंडे, दूध तथा दूध से बने पदार्थ
विटामिन की कमी से होने वाले रोग -
रक्त का थक्का न जमना
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