रविवार, 26 जुलाई 2020

विटामिन और उसके फायदे और उसकी कमी से होने वाले रोग












विटामिन या जीवन सत्त्व भोजन के अवयव है, जिनकी सभी जीवो को अल्प मात्रा में आवश्यकता होती है। रासायनिक रूप से ये कार्बनिक यौगिक को विटामिन कहा जाता है, जो शरीर द्वारा पर्याप्त मात्रा में स्वयं उत्पन्न नहीं किया जा सकता बल्कि भोजन के रूप में लेना आवश्यक है। विटामिन्स का सेवन शरीर के उचित विकास  और अन्य कार्यो की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण है, दरअसल विटामिन्स का मुख्यकार्य भोजन को ईंधन में बदलना है, जिससे शरीर में खाया हुआ ठीक से पच सके, और शरीर को सही रूप में एनर्जी मिल सके जो शरीर के कार्यो को प्रभावी ढंग से करने के लिए आयश्यक है। 


विटामिन A -आँखों से देखने के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। साथ ही यह संक्रामक रोगो से बचाता है। यह विटामिन शरीर में अनेक अंगो को सामान्य रूप में बनाये रखने में मदद करता है। जैसे की त्वचा, बाल, नाखून ग्रंथि, दांत, मसूड़ और हड्डी।


विटामिन A के स्रोत -

 ताजे फल, दूध, मांस, अंडा, मछली का तेल, गाजर, मक्खन, हरी सब्जियों, पनीर, पीले रंग के फल, चुकंदर आदि में होता है।


विटामिन A की कमी से होने वाले रोग -

सबसे महत्वपूर्ण स्थिति जो की सिर्फ विटामिन A के अभाव में होती है। वह है अँधेरे में कम दिखाई देना, जिसे रतौंधी कहते है, इसके साथ आँखों में आंसुओं की कमी से आँखे सूख जाती है, और उनमे घाव भी हो सकते है। बच्चों में विटामिन ए के अभाव में विकास भी धीमा हो जाता है। जिससे की उनके कद पर असर पड़ सकता है। त्वचा और बालो में भी सूखापन हो जाता है, और उनमे से चमक चली जाती है। संक्रमित बिमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।


विटामिन B 

विटामिन B शरीर को जीवन शक्ति देने के लिए अति आवश्यक होता है। इस विटामिन की कमी से शरीर अनेक रोगो का घर बन जाता है। विटामिन B के कई विभागों की खोज की जा चुकी है। ये सभी विभाग मिलकर ही विटामिन बी काम्प्लेक्स कहलाते है। हालांकि सभी विभाग एक दुसरे के अभिन्न अंग है. लेकिन फिर भी सभी आपस में भिन्नता रखते है। विटामिन बी काम्प्लेक्स १२० डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी सहन करने की छमता रखते है। उससे अधिक ताप यह सहन नहीं कर पाता और नष्ट हो जाता है। यह विटामिन पानी में घुलशील होता है इसके प्रमुख कार्य स्नायुओं को स्वस्थ रखना तथा भोजन के पाचन में सक्रिय योगदान देना होता है। क्षार पदार्थो के संयोग से यह बिना किसी ताप के नष्ट हो जाता है, पर अम्ल के साथ उबाले जाने पर भी नष्ट नहीं होता है।


विटामिन बी के स्रोत  - 

 विटामिन बी काम्प्लेक्स के श्रोतो में टमाटर, भूसीदार गेहू का आटा, अंडे की जर्दी, हरी पत्तियों का साग, बादाम, अखरोट, बिना पालिश किया चावल, पौधों के बीज, सुपारी, नारंगी, अंगूर, दूध ताजे सेम, ताजे मटर, दाल, जिगर, वनस्पति, साग-सब्जी, आलू, मेवा, खमीर, नारियल, पिस्ता, ताजे फल, दही, पालक, बंदगोभी, मछली, अंडे की सफेदी, माल्टा, चावल की भूसी, फलदार सब्जी आदि आते है।


विटामिन बी की कमी से होने वाले रोग -

हाथ पैरो की उंगलियों में सनसनाहट होना, मष्तिष्क की स्नायु में सूजन व् दोष होना, पैर ठन्डे व गीले होना, सर के पिछले भाग में स्नायु दोष हो जाना, मांसपेशियों का कमजोर होना, हाथ पैरो के जोड़ अकड़ना, शरीर का वजन घट जाना, नींद कम आना, शरीर पर लाल चकत्ती निकलना, दिल कंमज़ोर होना, शरीर में सूजन आना, सर चकराना, नजर कमजोर होना, पाचनक्रिया खराब होना।


विटामिन C -

विटामिन सी को एस्कार्बिक एसिड के नाम से भी जाना जाता है। यह शरीर की कोशिकाओं को बाँध के रखता है। इससे शरीर के विभिन्न अंगो को आकार बनाने में मदद मिलता है। यह शरीर के ब्लड वेस्स्ल या खून की नसों को मजबूत बनाता है। इसके एंटीहिस्टमीन गुणवत्ता के कारण यह सामान्य सर्दी-जुकाम में दवा का काम कर सकता है।


विटामिन सी के स्रोत -

विटामिन सी के अच्छे स्रोत है नारंगी जैसे फल या सिट्रस फ्रूट्स जैसे अंगूर, टमाटर, अमरुद, सेब, बेर, स्ट्राबेरी


विटामिन C  की कमी से होने वाले रोग -

 इसके अभाव में मसूड़ो से खून बेहता है, दाँत दर्द हो सकता है, दांत ढीले हो सकते है या निकल सकते है त्वचा या चर्म में भी चोट लगने पर अधिक खून बह सकता है, रूखा हो सकता है। आपको भूंख कम लगेगी, बहुत अधिक विटामिन के अभाव से स्कर्वी रोग हो सकता है। विटामिन सी की कमी से शरीर का वजन कम हो जाता है।


विटामिन D -

यह शरीर की हड्डियों को बनाने और संभाल कर रखने में मदद करता है, साथ ही यह शरीर में कैल्सियम के स्तर को नियंत्रित रखता है।


विटामिन D के स्रोत -

अंडे का पीला भाग, मछली का तेल, सोयाबीन, दूध और बटर इसके अच्छे स्रोत है। इसके अलावा धूप सेकने से भी शरीर में इसका निर्माण होता है।


विटामिन D की कमी से होने वाले रोग -

 इसके अभाव में हड्डियाँ कमजोर हो जाती है, और टूट भी सकती है। बच्चो में इस स्थिति को रिकेट्स और व्यस्क लोगो में हड्डी के मुलायम होने को ऑस्टियोमलेशिया कहते है। इसके अलावा हड्डी के पतला और कमजोर होने को ऑस्टियोपोरोसिस कहते है।


विटामिन E -

विटामिन ई खून में रेड ब्लड सेल्स या लाल रक्त कोशिका को बनाने के काम आता है। इसे टोकोफेराल भी कहते है। यह विटामिन शरीर में अनेक अंगो को सामान्य रूप में बनाये रखने में मदद करता है। जैसे की मांसपेशिया, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मजबूत शरीर को एलर्जी से बचाये रखने, कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित रखने एवं अन्य टिशू या उत्तक। यह शरीर को ऑक्सीज़न के एक नुकसानदायक रूप से बचाता है, जिसे ऑक्सीज़न रेडिकल्स कहते है।  इस गुण को एंटीऑक्सीडेंट कहा जाता है। विटामिन ई कोशिका के अस्तित्व बचाये रखता है, उनके बाहरी कवच या सेल्स मेम्ब्रेन को बनाये रखता है। विटामिन ई शरीर के फैटी एसिड को भी संतुलन में रखता है।


विटामिन E के स्रोत -

अंडे, सूखे मेवे, बादाम, अखरोट, सूरजमुखी के बीज, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, शकरकंद इसके अलावा विटामिन E वनस्पति तेल, गेहू, हरी साग, चना, जौ, खजूर, चावल के मांड,सरसों  में पाया जाता है।  


विटामिन E की कमी से होने वाले रोग -

जननशक्ति का कम होना


विटामिन K -

वसा में घुलनशील विटामिन है, तथा रक्त का धक्का जमाव के लिए अत्याआयश्यक होता है। रक्त का थक्का जमना मनुष्य के शरीर की एक विशिष्ट क्रिया है। यदि रक्त का थक्का न बने तो चोट लगने पर अत्यधिक रक्त स्त्राव के कारण व्यक्ति की मृत्यु भी संभव है, तथा कभी-कभी रक्त का थक्का बनना जानलेवा भी हो जाता है।  जैसे-मस्तिष्क में ब्लड क्लॉटिंग कई बार व्यक्ति को लकवाग्रस्त भी बना देती है।लीवर में विटामिन के द्वारा कुछ प्रकार के प्रोटीन्स जैसे-प्रोथ्रॉम्बिन तथा फाइब्रिनोजेन का पूर्ण संश्लेषण होता है। जो की रक्त का थक्का जमाने में सहायक होते है। ये संश्लेषित प्रोटीन रक्त में उपस्थित होते है, तथा जब शरीर में किसी प्रकार की चोट लगती है, तब ये प्रोथ्रॉम्बिन में परिवर्तित होकर रक्त का थक्का जमाते है। ब्लड प्लाज्मा में घुलनशील प्रोटीन फाइब्रिनोजन पाया जाता है.जो चोट लगने पर चोटिल स्थान पर थ्रोम्बिन तथा थ्रोम्बोप्लास्टिन के साथ मिलकर फाइब्रिन नामक जाल के सामान संरचना बनाती है।  जिसमे ब्लॉउड प्लाज्मा तथा कोशिकाएं फस जाती है। तथा इस प्रक्रिया को ही थक्का बनना कहते है। अतः स्पष्ट है कि विटामिन के शरीर में दो तरह से काम करता है, शरीर के अंदर ब्लड को जमने नहीं देता और शरीर के बाहर ब्लड को बहने नहीं देता।


विटामिन K के स्रोत -

सरसो के साग, पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, हरे पत्तेदार सब्जियां, पालक, धनिया, सूखे मेवे, नट्स, अंजीर,  किशमिश, बादाम, मछली, यकृत, मटन, अंडे, दूध तथा दूध से बने पदार्थ


विटामिन की कमी से होने वाले रोग -

रक्त का  थक्का न जमना

मंगलवार, 14 जुलाई 2020

इम्युनिटी और काढ़ा

कोरोना काल में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा बताये गए हर्बल चाय और काढ़ा बनाने की सामग्री और विधि 


इस समय पूरी दुनिया में कोरोना महामारी का प्रकोप है, और पूरी दुनिया इस महामारी की वजह से अपने घरो में बंद होने को मजबूर है, क्योकि कोरोना दिन प्रतिदिन अपने पैर पसार रहा है। यह महामारी अंकगणितीय रूप में फ़ैल रहा है। यह प्रतिदिन अपनी महामारी रुपी आतंक दुनिया के कोने-कोने में फ़ैला रहा है, और सभी इस महामारी से परेशान है, क्योंकि एक तरफ जहाँ इस महामारी से लोग मर रहे है, तो दूसरी तरफ सभी प्रकार के काम-काज भी बंद है और लोग इससे छुटकारा पाना चाहते है,और इससे छुटकारा पाने के कई उपाय है। जिसमे सबसे मुख्य है इम्युनिटी क्योकि इम्युनिटी हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक छमता बढ़ाती है। जो हमें इस महामारी से बचाये रखने में मदद करती है। इसलिए आयुष मंत्रालय ने भी हमें इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए काढ़ा और हर्बल चाय पीने की सलाह दी है, और आयुष मंत्रालय द्वारा दी गयी काढ़ा और हर्बल चाय की सामग्री और उनके बनाने की विधि के बारे में आज हम बात करेंगे -

तो आइये देखते है-


आयुष मंत्रालय द्वारा बताये गए हर्बल चाय और काढ़ा की सामग्री और उसे बनाने की विधि -


हर्बल चाय-                                                                                                                                               
काढ़े को लेकर आयुष मंत्रालय का कहना है कि इस हर्बल काढ़े का सेवन करने से कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है, उन्होंने कहा कि हर्बल काढ़ा में 4 औषधीय जड़ी बूटियों का समावेश किया गया है, जो भारतीय रसोई में आसानी से उपलब्ध होता है। 


इन चीजों से बनाये काढ़ा -
                                          इस आयुष काढ़े को घर में आराम से बनाया जा सकता है, जिसके लिये आपको  इन चीजों की जरूरत होगी।

1 .तुलसी का पत्ता-4
2 . दालचीनी छाल के दो टुकड़े
3 .सोंठ -2 टुकड़े
4 .काली मिर्च -1
5 .मुनक्का -4 


काढा बनाने की विधि -
यह काढ़ा बनाने के लिए तुलसी,दालचीनी,कालीमिर्च,अदरक या सोंठ, और मुनक्का को एक साथ पानी में उबाल ले और छानकर इस पानी का सेवन करे, इस काढ़े का सेवन दिन में दो बार कर सकते है, अगर इस काढ़े को  पीने में स्वाद में कोई परेशानी आये तो आप इसमें गुड़ या नीबू का रस मिला सकते है।

आयुष मंत्रालय ने सलाह दी है, कि सूखी खांसी या गले में सूजन के लिए दिन में एक या दो बार पुदीने की ताजा पत्तिया अजवाइन के साथ ले सकते है। गले में खराश के लिए दिन में दो या तीन बार प्राकृतिक शक्कर या शहद के साथ लौंग का पाउडर लेने के लिए भी आयुष मंत्रालय ने सलाह दी है।  

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रविवार, 12 जुलाई 2020

उपवास

उपवास एक तरह से हमारे शरीर के लिए दवा का  काम करता है, यह हमारे दिमाग को शांत और मन को प्रसन्न रखता ही है, साथ-साथ बढ़ते उम्र के साथ होने वाली नई-नई बीमारियों को भी दूर रखता है। 



यहाँ अक्सर सभी लोग उपवास को धर्म से जोड़कर देखते है, परन्तु ऐसा नहीं है उपवास का धार्मिक लाभ तो है ही इसके साथ-साथ यह हमारे सेहत को भी ठीक रखता है। इस समय बारिश का मौसम भी आ चुका है, और कोरोना महामारी भी फ़ैल रहा है, ऐसे में हम सभी को अपने सेहत को ठीक रखने के लिये सप्ताह में एक या दो दिन उपवास रखना चाहिए। 



 शोध के अनुसार 
                            यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ कैलिफोर्निया का शोध कहता है, कि उपवास करने से फैट तेजी से बर्न होता है, और मोटापा कण्ट्रोल करने में भी सहायता मिलती है। मोटापा और भी बीमारियों का एक मुख्य कारण है। जैसे -बैड कोलेस्ट्रोल का बढ़ना, ब्लड प्रेशर, डयबिटीज, दिल सम्बन्धी बिमारी, आदि बीमारियों का कारन है। व्रत रखने से बढ़ते वजन को रोकने में भी मद्दद मिलती है और बीमारियां भी काम होती है। उपवास रखने से नई रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं के बनने में सहायता होती है। शरीर के अंदर की गन्दगी को साफ करने में और पाचन क्रिया को ठीक रखने के लिए आप अपनी सुविधानुसार कभी भी उपवास कर सकते है। कई अध्ययन में यह पाया गया है कि कुछ समय के लिए उपवास से मेटाबोलिक रेट में 3 से 4 फीसदी तक बढ़ोत्तरी होती है। उपवास रखने से दिमाग भी स्वस्थ रहता है। उपवास रखने से डिप्रेसन और दिमाग से जुडी कई समस्याओं में लाभ होता है, उपवास करने से तनाव में भी फायदा होता है।



सेहत को ठीक रखने में उपयोगी उपवास -
                                                                   हमारे शरीर के पाचन तंत्र सिस्टम को भी थोड़ा आराम की जरूरत होती है, क्योकि लगातार काम करते हुए हमारा पाचन तंत्र भी खराब हो सकता है। पाचन तंत्र को आराम देने का सबसे अच्छा उपाय है, व्रत करना। जब हम कुछ भी खाते है, तो हमारे पूरे पाचन तंत्र को काम करना पड़ता है, विशेषतः लिवर और किडनी को ज्यादा काम करना पड़ता है। व्रत करने का सबसे ज्यादा फायदा हमारे शरीर को यह है कि इसको ज्यादा काम नहीं करना पड़ता है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन का एक शोध कहता है, यदि आप बीमारियों से बचना चाहते है, और वृद्धावस्था में भी सेहतमंद रहना चाहते है, तो व्रत करना आपके लिए लाभकारी हो सकता है, व्रत करने से आपके शरीर की चयापचय प्रक्रिया पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है, और बढ़ती उम्र की बीमारियों को दूर रखने में मदद मिलती है। कुछ भी न खाने से शरीर में सिरकेडियन क्लॉक और व्रत संचालित कोशिकीय प्रतिक्रियाओं पर असर पड़ता है। यदि नियमित व्रत रखा जाए तो हमारे शरीर की कोशिकीय प्रणाली पर सकारात्मक लाभ होगा, जो अतंतः हमारे स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव डालता है, और नई बीमारियों से भी बचाता है।



उपवास के फायदे अनेक -
                                          हफ्ते में कम से कम दो दिन दिन व्रत अवश्य रखना चाहिए, क्योकि व्रत रखने से जब हम कुछ भी नहीं  खाते है, तो शरीर में फैट सेल्स लैप्टिन नाम के हारमोन का स्त्राव होता है, जो हमारे वजन को कम रखने में सहायक होता है। विशेषज्ञो की माने तो कीमोथेरेपी कराने वाले मरीजो के लिए व्रत रखना बहुत फायदेमंद होता है। जब हम एक दिन का व्रत रखते है, तब  कुछ भी न खाने की वजह से हमारे शरीर की गन्दगी बाहर आती है, और शरीर की सफाई हो जाती है, और हमारा पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। उपवास करने से मेटाबोलिक रेट में 3 से 14 फीसदी तक बढ़ोत्तरी होती है। उपवास रखने से दिमाग भी स्वस्थ रहता है, डिप्रेसन और दिमाग से जुडी कई समस्याओं में लाभ होता है, जब आप उपवास करते है। तो इस समय शरीर में जमा चर्बी तेजी से गलना शुरू होता है, और मोटापा भी कम होता है। उपवास करने से नई रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं के बनने में मदद मिलती है।  
                                                                                          

गुरुवार, 9 जुलाई 2020

वर्षा ऋतु जितना सुहावना और खुशनुमा मौसम होता है, उतना ही यह मौसम अपने साथ बीमारियां भी लाता है,अतः हमें इस मौसम का आनंद लेने के साथ ही अपने आपको सुरक्षित भी रखने का ध्यान रखना चाहिए।



                                                                                                                                                                                                                                                                               
जैसा की हम जानते है, बरसात का मौसम आ चुका है, और बारिश हो रही है और धूप भी बहुत तेज हो रही है, जिससे गर्मी भी बहुत तेज है, और धूप की वजह से उमस है, और बरसात से गर्मी भी है। जिससे बीमारियां भी होने की बहुत संभावना रहती है। अतः इस मौसम में हमें अपने स्वास्थय की देख-भाल करने की जरूत है। जिससे बारिश से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके।  जैसे- जलजनित रोग, पेट से सम्बंधित बीमारियों, दूषित रक्त से चर्म रोग तथा मलेरिया, पेचिश आदि रोग हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालते है।
                                                                                                                                   


वर्षा ऋतु आ चुका है, और हम सभी के जीवन में एक नया संचार पैदा करता है। एक तरफ जहां इसका सुहावना मौसम गर्मी से राहत देता है। वही दूसरी तरफ स्वास्थय सम्बन्धी समस्याएं भी पैदा करता है। इस मौसम में प्रमुख जलजनित रोग हमारे स्वास्थय विपरीत प्रभाव डालते है। और हमें बीमार करते है। अतः आवश्यक है कि हम इस मौसम में सावधानी बरते, जिससे इस मौसम का आनंद उठाने के साथ-साथ हम स्वस्थ रह सके।  



  तो आइये देखते है। इससे सम्बंधित कुछ टिप्स                                                                                                                                                          
                                                                     बारिश के मौसम में पानी के दूषित होने की बहुत संभावना रहती है। इसलिए सभी को पानी को उबालकर ही पीना चाहिए और सभी के घरो में वाटर फिल्टर अवश्य होना चाहिए।  
                                                                           

     वर्षा ऋतु में वायु विकार अधिक कष्टकारी होता है। इसलिए सुबह उठने के पश्चात दिन की शुरूआत एक गिलास गुनगुने पानी में नीबू का रस और शहद दोनों दो से चार चम्मच डालकर पीने से पेट साफ रहता है, और पाचन शक्ति भी ठीक रहता है।                           
                                                                                                                       


 बारिश के मौसम में कीचड़ और पानी के कारण नंगे पैर नहीं टहलना चाहिए। सुबह और शाम को सैर करने वालो को पार्क और घर पर टहलने में सावधानी बरतनी चाहिए।


                                                 
 पेट की गड़बड़ी में खान-पान का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए ध्यान रखे कि बारिश के मौसम में बासी भोजन तथा बाज़ार में बिकने वाले खुले खाद्य पदार्थो का सेवन न करे।



                                                                             
                                                                      बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। अतः मलेरिया से बचाव के लिए तुलसी की चाय, या फिर अदरक और बड़ी इलायची की चाय बरसात के विकारो से बचाने में सहयोगी हैं।
                                                                   
                                    बारिश के मौसम में कपड़ो को धूप दिखाते रहना चाहिए और कपड़ो को पहनते समय झटककर और देखकर ही पहनना चाहिए, जिससे उसमे कोई बरसाती कीड़ा छुपा न रह जाए।


                                               
  भोजन गर्म और हल्का तथा सुपाच्य ही लेना चाहिए, अदरक,पुदीना,नीबू और हरी मिर्च आदि का प्रयोग इस मौसम में अवश्य करना चाहिए।


                                                                                         
       जिन स्थानों पर कूड़ा-करकट जमा होकर सड़ता हो और कीचड़ अधिक हो उन स्थानों को साफ रखने का प्रयास करे तथा पालतू जानवरो से होने वाली गन्दगी को साफ करते रहना चाहिए।   
                     
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मंगलवार, 7 जुलाई 2020

सैनिटाइज़र का उपयोग संभलकर करे

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए हाथों को सैनिटाइज़र से साफ़ करना जरूरी होता है तीन महीने से इसका इस्तेमाल कर रहे लोगों की आदत में यह शामिल हो गया है लोग बार-बार हैंडसैनिटाइज़र का इस्तेमाल कर रहे है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका अधिक व् बिना जरूरत इस्तेमाल त्वचा, पेट के रोग पैदा कर सकता है, डॉ. सैनिटाइज़र के फायदे-नुकशान बताते हुए कहते हैं |  कि कोरोना की दस्तक से पहले सैनिटाइज़र के बारे में आम तौर पर डॉक्टर ही जानते थे।
                                              वह मरीज देखने के बाद, आपरेशन करने के पहले व् बाद में अपने हाथ आपरेशन करने के पहले व् बाद में अपने हाथ सैनिटाईज़ करते थे। कोरोना काल की शुरुआत में तो सैनिटाइज़र दुरलभ जड़ी-बूटी की तरह हो गया था।  आसानी से मिल ही नहीं रहा था।  हालांकि अब हर दूकान पर कई रेट,   साइज व् सुगंध में उपलब्ध है। इसके इस्तेमाल का सही तरीका व् गुणवत्ता न जानने के चलते बहुत से लोग अपने को खतरे में डाल रहे है।
            पेट में जाने से खतरा :
                                              सैनिटाइज़र में अलकोहल की मात्रा ज्यादा होती है। इसे हाथो पर लगाने के बाद उसी हाथ से तमाम लोग नाश्ता, भोजन कर लेते है। ऐसा करना उनकी सेहत पर गंभीर ख़तरा उत्पन्न कर सकता है।  दरअसल हैंड सैनिटाइज़र में कई प्रकार के केमिकल्स मिले होते है। कीटाणुओ को नष्ट करने के लिए अलकोहल की मात्रा होती है।  ऐसे में फूड प्वाजनिंग  हो सकती है।
                                             मानव शरीर में अच्छे और नुक्सानदायक दोनों प्रकार के बैक्टेरिया पाए जाते है। हाथों पर भी कुछ अच्छे बैक्टीरिया होते है।  ऐसे में कोरोना के डर से लगातार सैनिटाइज़र से हाथ साफ करने के कारण हाथों पर मौजूद लाभकारक बैक्टीरिया भी मर जाते है।  
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शनिवार, 4 जुलाई 2020

इम्युनिटी बढ़ाने के उपाय

            इस वैश्विक कोरोना महामारी से बचने के लिए अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाये रखने की जरूत है जिससे हम स्वयं को और अपने परिवार और अपने समाज स्वस्थ बनाये रख सके  

कोरोना वायरस ने इस समय पूरी दुनिया में आतंक मचा रखा है और यह भी सत्य है कि  कोरोना वायरस अंतिम वायरस नहीं है और भी कई जानलेवा वायरस आएंगे जरूरी है,कि आप अपनी  इम्युनिटी बढ़ाये और खुद को अंदर से मजबूत बनाये जिससे आप जल्दी बीमार न पड़े और आप स्वयं को और अपने परिवार और समाज को स्वस्थ बनाये रखे तो आज हम अपनी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कुछ उपाय के बारे में जानेंगे जो हमें अपने घरो में या अपने आसपास बड़ी ही आसानी से मिल जाते है |


१.गिलोय का रस या काढ़ा - 
                                           गिलोय के तने को चार इंच लम्बाई में काट ले और उसे छोटे-छोटे टुकड़ो में काट ले और पीस कर पेस्ट बना ले फिर चार  कप पानी में एक चौथाई चम्मच हल्दी के साथ  को उबाल ले यह ध्यान रखे की ढक कर नहीं उबालना है ,और जब उबलते हुए एक कप बच जाए तो एक चुटकी काली मिर्च मिलाकर सुबह खाली पेट पीना है


२.नीबू -
             नीबू में विटामिन सी पाया जाता है ,अतः आप प्रतिदिन नीबू पानी का सेवन करे और इससे आपके शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होगा   | 


३ .सेब का सिरका और लहसुन -
                                                  सेब के सिरके में भीगी हुई लहसुन की २ कालिया एक दिन छोडकर ले सेब का सिरका और लहसुन दोनों  ही इम्यूनोमोडुलेटर होते है, इसलिए यह इम्युनिटी बढ़ाने का बड़ा आसान उपाय है | 


४ . हल्दी पाउडर और शहद -
                                           आधा चम्मच हल्दी पाउडर और उसमे  शहद मिलाकर  रोजाना सोते समय दूध  से ले इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए हल्दी बहुत उपयोगी है शहद  भी इम्यूनोमोडुलेटर है , यह इम्युनिटी बढ़ाने के लिए एक आसान उपाय है


५ . धूप -
            धूप से बेहतरीन और मुफ़्त का इम्युनिटी बूस्टर कोई और नहीं है ,यह  विटामिन ही का स्रोत है जो कि इम्युनिटी के लिए जिम्मेदार विटामिन  में से एक है रोजाना कम से कम ३० मिनट धूप में बिताये यह आपको शक्ति और ऊर्जा से भर देगी  | 



६ .आंवला पाउडर और शहद -
                                             आधा चम्मच आंवला पाउडर लीजिये और उसमे शहद मिलाकर रोजाना सुबह ले आंवला विटामिन सी का सर्वश्रेष्ट स्रोत है ,और विटामिन सी इम्युनिटी का चमत्कारी ढंग से बढ़ाने के लिए मशहूर है | 


७ .इबादत -
                 जब समय मिले आप ध्यान प्रार्थना  या इबादत करे जब मन शांत और भय मुक्त रहता है तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है यह सबसे आसान और कारगर इम्युनिटी बूस्टर है |