गुरुवार, 13 अगस्त 2020

इलायची के फायदे, elaichi benefits in hindi

 


इलायची का सेवन आमतौर पर मुखशुद्धि के लिए अथवा मसाले के रूप में किया जाता है। यह दो प्रकार की आती है, हरी या छोटी इलायची तथा बड़ी इलायची जहाँ वयंजनो को लजीज बनाने के लिए एक मसाले के रूप में प्रयुक्त होती है, वही हरी इलायची मिठाइयों की खुशबू बढाती है। मेहमानो की आवाभगत में भी इलायची का इस्तेमाल होता है। लेकिन इसकी महत्ता केवल यही तक सीमित नहीं है। यह औषधीय गुणों की खान है। संस्कृत में इसे एला कहा जाता है। ये पाचनबर्धक तथा रूचिवर्धक होते है। 

                                                         


इलायची  के  प्रकार - इलायची मुख्यतः दो प्रकार की होती है छोटी इलायची और बड़ी इलायची जहाँ छोटी इलायची का प्रयोग मुख्यतः अतिथिसत्कार मुखशुद्धि और मिठाइयों, पकवानो को सुगन्धित बनाने के लिए होता है, तो वही बड़ी इलायची का प्रयोग मुख्यतः सब्जियों को स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है। और दोनों तरह की इलायची का प्रयोग विभिन्न तरह के रोगो के उपचार को ठीक करने के लिए भी किया जाता है। आयुर्वेदिक मतानुसार इलायची शीतल, तीक्षण, मुख को शुद्ध करने वाली, पित्तजनक तथा वात, श्वास, खांसी, बवासीर, क्षय, वस्तिरोग, सुजाक, पथरी, खुजली, मूत्रवृक्ष तथा ह्रदय रोग में लाभदायक है।

इलायची से होने वाले फायदे 

1 - खराश - यदि आपकी आवाज बैठी हुई है या गले में खराश है, तो सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले छोटी  इलायची चबाकर खाये तथा गुनगुना पानी पिए। इसके सेवन से गले में होने वाले दर्द में आराम मिलगा।

2 - सूजन -  गले में सूजन आ गई हो तो मूली के पानी में छोटी इलायची पीसकर सेवन करने से लाभ होता है। 

3 - खांसी - सर्दी खांसी और छींक होने पर एक छोटी इलायची, एक टुकड़ा अदरक, लौंग तथा पाँच तुलसी के पत्ते एक साथ पान में रखकर खाये।   

4 - उल्टी - बड़ी इलायची पाँच ग्राम लेकर आधा लीटर पानी में उबाल ले। जब पानी एक चौथाई रह जाए, तो उतार ले यह पानी पीने से उल्टियाँ बंद हो जाती है।

5 - छाले - मुँह में छाले हो जाने पर बड़ी इलायची को महीन पीसकर और उसमे पीसी हुई मिश्री मिलाकर जबान पर रखे तुरंत लाभ होगा। 

6 - बदहजमी - यदि केले अधिक मात्रा में खा लिए हो तो तत्काल एक इलायची खा ले। केले पच जाएंगे और आपको हल्कापन महसूस होगा।  

7 - जी मचलाना - बहुत लोगो को यात्रा के समय चक्कर आते है या जी घबराता है, इससे निजात पाने के लिये एक छोटी इलायची मुँह में रख ले  आराम मिलेगा।  

8 - फेफड़ो के समस्या के लिए - छोटी इलायची से फेफड़ो में रक्त संचार तेज गति से होने लगता है। इससे सांस लेने की समस्या जैसे अस्थमा, तेज जुकाम, और खांसी से राहत मिलती है, आयुर्वेद में इलायची की तासीर गर्म मानी है। जो कि शरीर को गर्मी देती है, इसलिए इसके सेवन से आपके शरीर पर ठण्ड का असर कम होता है। 

9 - रक्तचाप ठीक रखने के लिए - छोटी इलायची में पोटैशियम, फाइबर, होता है। जो BLOOD PRESSUR को नियंत्रित करता है। मानव शरीर में अधिकत्तर बीमारिया उच्च रक्तचाप के कारण जन्म लेती है, यदि आप भी प्रतिदिन दो से तीन इलायची का सेवन करे तो जिंदगी भर आपका रक्तचाप नियंत्रित रहेगा। 

10 - मुँह की दुर्गंध दूर करे - छोटी इलायची स्वाद बढाने के साथ ही माउथ फ्रेशनर का भी काम करती है, इसे खाने से मुँह की बदबू में राहत मिलती है, यदि आपके मुँह से तेज दुुर्गंध आती है, तो आप हर समय एक इलायची अपने मुँह में रख सकते है। इससे आपके मुँह से दुर्गन्ध आना बंद  हो जाएगा। 

11 - कब्ज में राहत - कब्ज से परेशान लोगो को छोटी इलायची का सेवन करना चाहिए, कब्ज की समस्या होने पर छोटी इलायची को पकाकर तैयार किये गए पानी का सेवन आपको फायदा पहुचायेंगा, यह आपकी पाचन क्रिया को दुरुस्त कर कब्ज से राहत देती है।

12 - उल्टी में राहत - यदि आपको सफर में उल्टी की समस्या होती है, तो आपको सफर शुरू करने से पहले छोटी इलायची का सेवन करना चाहिए छोटी इलायची आपको इस समस्या से राहत देगा, यदि आपको लगता है कि सफर में उल्टी की समस्या सफर में पूरे समय हो सकती है तो आप पूर रास्ते छोटी इलायची मुँह में रख सकते है। 

13 - विषाक्त पदार्थो से छुटकारा - शरीर में विषाक्त पदार्थो की अधिकता होने पर आपकी तबियत ज्यादा खराब हो सकती है, इलायची का सेवन शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थो को दूर करने में कारगर है, जो आपको बीमार नहीं होने देता है, इसलिए जरूरी है कि आप प्रतिदिन इलायची का सेवन करे और यदि आप प्रतिदिन इलायची का सेवन नहीं कर सकते है, तो हफ्ते में तीन से चार बार इलायची का सेवन अवश्य करे। 


14 - एसिडिटी से राहत - आपको बता दे कि इलायची में तेल भी मौजूद होता है, इलायची में मौजूद एसेंशियल आयल पेट की अंदरूनी लाइनिंग को मजबूत करता है, एसिडिटी की समस्या से पेट में एसिड जमा हो जाते है। इसके सेवन से वो धीरे-धीरे हट जाते है।और एसिडिटी से राहत मिलता है। 

15 - तनाव से मुक्त रखे - यदि आप अक्सर तनाव में रहते है, तो इलायची का सेवन आपके लिए गुणकारी साबित होगा, कई बार होता है कि आप अकेले है और ज्यादा तनाव से गुजर रहे है, तो ऐसे में दो इलायची मुँह में डालकर चबाये इलायची चबाने से हार्मोन में तुरंत बदलाव हो जाता है, और आप तनाव से मुक्त हो जाते है। 

16 - ख़राब बैक्टेरिया से लड़ने में मदद करे - इलायची आपको ख़राब बैक्टीरिया और बदबू से दूर रहने में मदद करता है। इलायची का सबसे बड़ा फायदा यह है, कि यह आपके मुँह में होने वाले बैक्टीरिया को दूर रखता है, और साथ ही दांतो की बिमारी को भी दूर रखता है। 

17 - हिचकी बंद करे - हम सभी को कभी-कभी अचानक हिचकी आने लगती है, इसकी कोई दवा तो नहीं बनी है, परन्तु कुछ नेचुरल तरीके से इसे बंद किया जा सकता है। कई बार ये बहुत देर तक लगातार आती है, जिससे परेशानी महसूस होती है। इसे बंद करने के लिए आपको इलायची मुँह में रखनी है। इसे चबाते रहिये कुछ देर में हिचकी गायब हो जायेगी। 

18 - दिमाग को मजबूत करे -  इलायची दिमाग को मजबूत करने और आँखों की रौशनी बढ़ाने व् याददाश्त बढ़ाने में इलायची बहुत मददगार है। इलायची के दानो को 2-3 बादाम व 2-3 पिस्ता के साथ 250 मिली दूध में इसे मिलाकर आधा होने तक उबाले और जब ये आधा हो जाए तो इसमें मिश्री मिलाये और इसे पी ले ये बच्चो के लिए बहुत फायदेमंद है। 

19 - दिल की रक्षा - इलायची में मौजूद खनिज तत्व दिल की रक्षा करने में सहायक है। इलायची खाने से पल्सरेट सही रहता है व खून का संचालन सुचारू रूप से होता है।

20 - वजन घटाने में सहायक - रात को सोने से पहले एक या दो इलायची चबाये और ऊपर से एक गिलास गर्म पानी पिए। इलायची में मौजूद फाइबर, कैल्सियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम विटामिन-बी1, बी-6, और विटामिन-सी आपके अतिरिक्त वजन को घटाने में सहायक है। 

21 - मूत्रविकार में लाभ - आयुर्वेद में इलायची का उपयोग मूत्रपथ के रोगो और सिस्टिटिस, नैफ्रैटिस,और गोनोरिया जैसे संक्रमणों के लिए एक उपाय के रूप में किया गया है।   

22 - एनीमिया से लड़ने में फायदेमंद - इलायची का एक अन्य प्रमुख घटक तांबा, लोहा और आवश्यक विटामिन जैसे राइबोफ्लेमिन, विटामिन-सी और नियासिन है। लोहे के अलावा लाल रक्त कोशिकाओं और सेलुलर चयापचय तांबा, राइबोफ्लेबिन विटामिन-सी और नियासिन के उत्पादन में इसके अत्यधिक महत्व के लिए जाना जाता है। एक गिलास गर्म दूध में एक चुटकी इलायची पाउडर और हल्दी मिलाये। आप चाहे तो स्वाद के लिए थोड़ी चीनी मिला सकते है, यह हर रात पीना कमजोरी और एनीमिया और एनीमिया के अन्य लक्षणों को दूर करने में मदद करता है। 

इलायची के नुकसान 

1 - एलर्जी - ज्यादा मात्रा में इलायची खाने या फिर लगातार इलायची खाने से शरीर में रिएक्शन होने लगता है। और फिर एलर्जी होने लगती है, जिससे शरीर में खुजली, स्किन रेशेश, लाल धब्बे आ जाते है। कई लोगो को इलायची से एलर्जी का अनुमान नहीं होता और वे इसे खा लेते है, जिससे उन्हें सांस में तकलीफ होने लगती है। इस एलर्जी के कुछ लक्षण है- 

- सीने व गले में खिचाव व दर्द                                                                                                                           

- सांस लेने में परेशानी 

- जी मचलाना 


2 - पथरी - कई बार इलायची पथरी का कारण बन जाती है, एक शोध के अनुसार पता चला है, कि हमारा शरीर इलायची को पूरी तरह पचा नहीं पाता है, और फिर अत्यधिक मात्रा में इसे लेने से ये धीरे-धीरे इकट्ठे होते जाते है, और गॉलब्लैडर स्टोन का कारण बन जाता है। पथरी के रोगियो को इलायची से परहेज करना चाहिए। 

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मंगलवार, 11 अगस्त 2020

दालचीनी के फायदे और नुकसान


दालचीनी हमारे घरो में आसानी से मिलने वाले मसालों में से एक है, और यह हमारे सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।और इसके विविध फायदे है, आजकल लोग बहुत ही छोटी-छोटी बीमारियों से परेसान रहते है। जबकि दालचीनी हमारे घरो में बड़ी आसानी से मिल जाते है, और हम इसका उपयोग करके इन बीमारियों से छुटकारा पा सकते है। तो आइये आज हम दालचीनी के फायदे के बारे में जानकारी लेते है। 
  
दालचीनी एक छोटा सदाबहार पेड़ है, जो 10 -15 मी. उँचा होता है । यह लौरेसिई (lauraceae) परिवार का वृक्ष है।  यह श्रीलंका एवं दक्षिण भारत में बहुतायत में मिलता है। इसकी छाल मसाले की तरह प्रयोग होती है, इसमें एक अलग ही सुगंध होती है, जो की इसे गरम मसालो की श्रेणी में रखती है। इसकी पत्तियों के तेल से मच्छर भगाया जाता है। इसका उपयोग सब्जियों को स्वादिष्ट बनाने में किया जाता है। 
 
गरम मसालों और औषधि के रूप में प्रयुक्त दालचीनी सिंनोमोमम जाइलैनिकम ब्रेन पेड़ की छाल का नाम है। जिसे अंग्रजी में कैसियाबार्क का बृक्ष कहा जाता है। इसका पेड़ श्रीलंका,भारत,पूर्वी द्वीप, तथा चीन इत्यादि देशो में साधारणतया सुलभ है।  

गरम मसालों के  रूप में इसका उपयोग भारत में हजारो वर्षो से होता आ रहा है। इसका वर्णन संस्कृत के प्राचीन ग्रंथो में भी प्राप्त होता है। इतिहास के अध्ययन से भी ज्ञात होता है, कि इसका निर्यात अरब, मिस्र, ग्रीस, इटली और यूरोप के सभी देशो में होता था। बाइबिल में भी इसका उल्लेख है। आयुर्वेद में दालचीनी को एक बहुत ही फायदेमंद औषधि के रूप में बताया गया है। आयुर्वेद के अनुसार दालचीनी के इस्तेमाल से कई रोगो का इलाज किया जा सकता है।

दालचीनी के सेवन से पाचनतंत्र सम्बन्धी विकार, दांत व सिर दर्द, चर्म रोग मासिक धर्म की परेशानियां ठीक की जा सकती है। दस्त और टीबी में भी इसके प्रयोग से लाभ मिलता है। आप जरूर जान ले की दालचीनी के इस्तेमाल से कितने प्रकार के फायदे होते है, ताकि समय पर दालचीनी का उपयोग कर आप भी फायदा ले सके। दालचीनी भूख बढाती है,दांत के दर्द से आराम दिलाती है। दस्त से आराम दिलाती है, और खांसी ठीक करने में मदद करती है।

दालचीनी के विभिन्न रोगो में होने वाले उपयोग 

1-भूंख बढ़ाने के लिए -500 मिग्रा० शुंठी चूर्ण, 500  मिग्रा०, इलायची, तथा 500 मिग्रा०, दालचीनी को पीस ले। भोजन के पहले सुबह-शाम लेने से भूख बढती है। 

2-उल्टी रोकने के लिए -दालचीनी का प्रयोग उल्टी रोकने के लिए भी किया जाता है। दालचीनी और लौंग का काढ़ा बना ले। 10 -20 मिली मात्रा में पिलाने से उल्टी पर रोक लगती है।

3-आँखों के रोग में दालचीनी का प्रयोग - अनेक लोग बराबर शिकायत करते है, की उनकी आँखे फड़कती रहती है। दालचीनी का तेल आँखों के ऊपर (पलक) लगाए। इससे आँखों का फड़कना बंद हो जाता है, और आँखों की रौशनी भी बढ़ती है। 

4-दांत के दर्द में -  जिनके दांत दर्द में शिकायत रहती है, वे लोग दालचीनी का फायदा ले सकते है। दालचीनी के तेल को रूई से दांतो में लगाए इससे आराम मिलेगा दालचीनी के 5-6 पत्तो को पीसकर मंजन करे, इससे दांत साफ और चमकीले हो जाते है।  

5-सिरदर्द में प्रयोग - अगर आप सिरदर्द से परेशान रहते है, तो दालचीनी का सेवन करे , दळचनी के 8 -10 पत्तो को पीसकर लेप बना ले, दालचीनी के लेप को मस्तक पर लगाने से ठंड या गर्मी से होने वाली सरदर्द से आराम 
 मिलता है। आराम मिलने पर लेप को साफ कर ले।  

दालचीनी के तेल से सिर पर मालिश करे। इससे सर्दी की वजह से होने वाले सिरदर्द से आराम मिलती है।

दालचीनी तेजपत्ता तथा चीनी को बराबर-बराबर मात्रा में मिला ले इसे चावल धोवन (चावल को धोने के बाद निकाला गया पानी) से पीस कर बारीक चूर्ण बना ले, इसे नाक के रास्ते ले, इसके बाद गाय के घी को भी नाक के रास्ते ले, इससे सिर से सम्बंधित विकारो में आराम मिलता है। 

आप तंत्रिका-तंत्र सम्बन्धी परेशानियों के लिए दालचीनी के तेल को सिर पर लगाए, इससे फायदा होता है।

6-जुकाम में दालचीनी का इस्तेमाल - दालचीनी को पानी में घिस ले और गर्म कर लेऔर लेप के रूप में लगाए इससे जुकाम में फायदा होता है।  

दालचीनी का रस निकालकर सिर पर लेप करने से भी लाभ होता है।  

7-खांसी में फायदा - खांसी के इलाज के लिए दालचीनी का प्रयोग करना फायदेमंद होता है। खांसी से परेशान रहने वाले लोग आधा चम्मच दालचीनी के चूर्ण को 2 चम्मच मधु के साथ सुबह-शाम सेवन करे। इससे खांसी से आराम मिलता है।  

दालचीनी के पत्ते का काढ़ा बना ले। 10-20 मिग्रा० मात्रा में सेवन करने से खांसी ठीक होती है।  

एक चौथाई चम्मच दालचीनी के चूर्ण में 1 चम्मच मधु को मिला ले। इसे दिन में तीन बार सेवन करने से खांसी और दस्त में फायदा होता है। 

8-नाक के रोग में - दलचीनी 3.5 ग्रा० लौंग, 600 मिग्रा०, सौंठ 2 ग्रा०, को एक लीटर पानी में उबाल ले। जब यह पानी 250 मिली०,रह जाए, तो इसे छान ले इसको दिन में 3 बार लेने से नाक के रोग में लाभ होता है। आपको इसे 50 मिली की मात्रा में लेना है।  

9-पेट फूलने पर - पेट से सम्बंधित कई तरह के रोगो में दालचीनी बहुत ही फायदेमंद होती है। 5 ग्रा दालचीनी चूर्ण में 1 चम्मच मधु मिला ले इसे दिन में 3 बार सेवन करे। पेट के फूलने की बिमारी ठीक होती है।  

10-कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए  - जिन लोग के शरीर का वजन अधिक होता है, वे वजन को कम करने के लिए कई तरह के उपाय करते है। आप भी मोटापा कम करने में दालचीनी से फायदा ले सकते है।  एक कप पानी में 2 चम्मच मधु तथा तीन चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिला ले।  इसका रोजाना 3 बार सेवन करे। इससे कोलेस्ट्रॉल कम होता है। 

11-दस्त पर रोक लगाने के लिए -  5 ग्रा दालचीनी चूर्ण में 1 चम्मच मधु मिला ले। इसे दिन में 3 बार सेवन करे। इससे दस्त में फायदा होता है।  

750 मिग्रा दालचीनी के चूर्ण में 750 मिग्रा कत्था चूर्ण मिला ले इसे पानी के साथ दिन में तीन बार सेवन करे। इससे दस्त पर रोक लगती है। 

इसी तरह 4 ग्राम दालचीनी तथा 10 ग्राम कत्था को मिलाकर पीस ले। इसमें 250 मिग्रा खौलते हुए पानी में डालकर ढक दे। दो घंटे बाद इसे छानकर दो हिस्से करके पिए। इससे दस्त बंद हो जाते है।  

बेलगिरी के शरबत में 2-5 ग्रा दलचीनी का चूर्ण मिला ले। इसे सुबह-शाम पीने से दस्त की समस्या में लाभ होता है।  
12-आमाशय विकार में - दालचीनी इलायची और तेजपत्ता को बराबर-बराबर लेकर काढ़ा बना ले। इसके  सेवन से आमाशय की ऐठन ठीक होती है।  

13-आंतो के रोग में - आंतो को स्वस्थ रखने के लिए भी दालचीनी का इस्तेमाल करना अच्छा परिणाम देता है।  दालचीनी का तेल पेट पर मलने से आंतो का खिचाव दूर हो जाता है।  

14-चर्म रोग में - चर्म रोग को ठीक करने के लिए शहद एवं दालचीनी को मिलकर रोग वाले अंग पर लगाए। आप देखेंगे की थोड़े ही दिनों में खुजली-खाज, तथा फोड़े-फुंसी ठीक होने लगेंगे।  

15-बुखार में लाभ - 1 चम्मच शहद में 5 ग्राम दालचीनी का चूर्ण मिला ले, सुबह दोपहर और शाम को सेवन करने से ठंड के साथ आने वाला संक्रामक बुखार ठीक होता है।  

16-गठिया में लाभ - 10-20 ग्रा दालचीनी के चूर्ण को 20-30 ग्रा मधु में मिलाकर पेस्ट बना ले। इसे दर्द वाले स्थान पर धीरे-धीरे मालिश करे। इससे फायदा मिलेगा।  

नुक्सान - जैसे कोई भी चीज किसी के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन जरूरी नहीं की इससे सभी को फायदा मिले। दुसरे व्यक्ति को उससे हानि भी हो सकती है। इसी तरह दालचीनी के नुक्सान भी होते  है।  

दालचीनी का अधिक मात्रा में सेवन करने से सिरदर्द की शिकायत हो सकती है।  

दालचीनी गर्भवती स्त्रियों को नहीं देनी चाहिए, क्योंकि यह गर्भ को गिरा देती है।  
इसलिए दालचीनी के नुक्सान से बचने के लिए इस्तेमाल से पहले चिकित्सक से सलाह जरूर ले।  

उपयोगी भाग -  पत्ते, छाल, जड़
स्वाद बढ़ाने के लिए - दालचीनी के पत्ते और छाल के उपयोगी से केक, मिठाई और खाने का स्वाद बढ़ाया जाता है। दालचीनी का तेल इत्र, मिठाई और पेय में उपयोग किया जाता है। 

सावधानी - दालचीनी उष्ण गुणधर्म की है, इसलिए गर्मी के दिनों में कम उपयोग करे। 
                    दालचीनी  से पित्त बढ़ सकता है। 
                    उष्ण प्रकृति के लोग चिकित्सक से सलाह ले