दालचीनी हमारे घरो में आसानी से मिलने वाले मसालों में से एक है, और यह हमारे सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।और इसके विविध फायदे है, आजकल लोग बहुत ही छोटी-छोटी बीमारियों से परेसान रहते है। जबकि दालचीनी हमारे घरो में बड़ी आसानी से मिल जाते है, और हम इसका उपयोग करके इन बीमारियों से छुटकारा पा सकते है। तो आइये आज हम दालचीनी के फायदे के बारे में जानकारी लेते है।
गरम मसालों और औषधि के रूप में प्रयुक्त दालचीनी सिंनोमोमम जाइलैनिकम ब्रेन पेड़ की छाल का नाम है। जिसे अंग्रजी में कैसियाबार्क का बृक्ष कहा जाता है। इसका पेड़ श्रीलंका,भारत,पूर्वी द्वीप, तथा चीन इत्यादि देशो में साधारणतया सुलभ है।
गरम मसालों के रूप में इसका उपयोग भारत में हजारो वर्षो से होता आ रहा है। इसका वर्णन संस्कृत के प्राचीन ग्रंथो में भी प्राप्त होता है। इतिहास के अध्ययन से भी ज्ञात होता है, कि इसका निर्यात अरब, मिस्र, ग्रीस, इटली और यूरोप के सभी देशो में होता था। बाइबिल में भी इसका उल्लेख है। आयुर्वेद में दालचीनी को एक बहुत ही फायदेमंद औषधि के रूप में बताया गया है। आयुर्वेद के अनुसार दालचीनी के इस्तेमाल से कई रोगो का इलाज किया जा सकता है।
दालचीनी के सेवन से पाचनतंत्र सम्बन्धी विकार, दांत व सिर दर्द, चर्म रोग मासिक धर्म की परेशानियां ठीक की जा सकती है। दस्त और टीबी में भी इसके प्रयोग से लाभ मिलता है। आप जरूर जान ले की दालचीनी के इस्तेमाल से कितने प्रकार के फायदे होते है, ताकि समय पर दालचीनी का उपयोग कर आप भी फायदा ले सके। दालचीनी भूख बढाती है,दांत के दर्द से आराम दिलाती है। दस्त से आराम दिलाती है, और खांसी ठीक करने में मदद करती है।
दालचीनी के विभिन्न रोगो में होने वाले उपयोग
1-भूंख बढ़ाने के लिए -500 मिग्रा० शुंठी चूर्ण, 500 मिग्रा०, इलायची, तथा 500 मिग्रा०, दालचीनी को पीस ले। भोजन के पहले सुबह-शाम लेने से भूख बढती है।
2-उल्टी रोकने के लिए -दालचीनी का प्रयोग उल्टी रोकने के लिए भी किया जाता है। दालचीनी और लौंग का काढ़ा बना ले। 10 -20 मिली मात्रा में पिलाने से उल्टी पर रोक लगती है।
3-आँखों के रोग में दालचीनी का प्रयोग - अनेक लोग बराबर शिकायत करते है, की उनकी आँखे फड़कती रहती है। दालचीनी का तेल आँखों के ऊपर (पलक) लगाए। इससे आँखों का फड़कना बंद हो जाता है, और आँखों की रौशनी भी बढ़ती है।
4-दांत के दर्द में - जिनके दांत दर्द में शिकायत रहती है, वे लोग दालचीनी का फायदा ले सकते है। दालचीनी के तेल को रूई से दांतो में लगाए इससे आराम मिलेगा दालचीनी के 5-6 पत्तो को पीसकर मंजन करे, इससे दांत साफ और चमकीले हो जाते है।
5-सिरदर्द में प्रयोग - अगर आप सिरदर्द से परेशान रहते है, तो दालचीनी का सेवन करे , दळचनी के 8 -10 पत्तो को पीसकर लेप बना ले, दालचीनी के लेप को मस्तक पर लगाने से ठंड या गर्मी से होने वाली सरदर्द से आराम
मिलता है। आराम मिलने पर लेप को साफ कर ले।
दालचीनी के तेल से सिर पर मालिश करे। इससे सर्दी की वजह से होने वाले सिरदर्द से आराम मिलती है।
दालचीनी तेजपत्ता तथा चीनी को बराबर-बराबर मात्रा में मिला ले इसे चावल धोवन (चावल को धोने के बाद निकाला गया पानी) से पीस कर बारीक चूर्ण बना ले, इसे नाक के रास्ते ले, इसके बाद गाय के घी को भी नाक के रास्ते ले, इससे सिर से सम्बंधित विकारो में आराम मिलता है।
आप तंत्रिका-तंत्र सम्बन्धी परेशानियों के लिए दालचीनी के तेल को सिर पर लगाए, इससे फायदा होता है।
6-जुकाम में दालचीनी का इस्तेमाल - दालचीनी को पानी में घिस ले और गर्म कर लेऔर लेप के रूप में लगाए इससे जुकाम में फायदा होता है।
दालचीनी का रस निकालकर सिर पर लेप करने से भी लाभ होता है।
7-खांसी में फायदा - खांसी के इलाज के लिए दालचीनी का प्रयोग करना फायदेमंद होता है। खांसी से परेशान रहने वाले लोग आधा चम्मच दालचीनी के चूर्ण को 2 चम्मच मधु के साथ सुबह-शाम सेवन करे। इससे खांसी से आराम मिलता है।
दालचीनी के पत्ते का काढ़ा बना ले। 10-20 मिग्रा० मात्रा में सेवन करने से खांसी ठीक होती है।
एक चौथाई चम्मच दालचीनी के चूर्ण में 1 चम्मच मधु को मिला ले। इसे दिन में तीन बार सेवन करने से खांसी और दस्त में फायदा होता है।
8-नाक के रोग में - दलचीनी 3.5 ग्रा० लौंग, 600 मिग्रा०, सौंठ 2 ग्रा०, को एक लीटर पानी में उबाल ले। जब यह पानी 250 मिली०,रह जाए, तो इसे छान ले इसको दिन में 3 बार लेने से नाक के रोग में लाभ होता है। आपको इसे 50 मिली की मात्रा में लेना है।
9-पेट फूलने पर - पेट से सम्बंधित कई तरह के रोगो में दालचीनी बहुत ही फायदेमंद होती है। 5 ग्रा दालचीनी चूर्ण में 1 चम्मच मधु मिला ले इसे दिन में 3 बार सेवन करे। पेट के फूलने की बिमारी ठीक होती है।
10-कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए - जिन लोग के शरीर का वजन अधिक होता है, वे वजन को कम करने के लिए कई तरह के उपाय करते है। आप भी मोटापा कम करने में दालचीनी से फायदा ले सकते है। एक कप पानी में 2 चम्मच मधु तथा तीन चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिला ले। इसका रोजाना 3 बार सेवन करे। इससे कोलेस्ट्रॉल कम होता है।
11-दस्त पर रोक लगाने के लिए - 5 ग्रा दालचीनी चूर्ण में 1 चम्मच मधु मिला ले। इसे दिन में 3 बार सेवन करे। इससे दस्त में फायदा होता है।
750 मिग्रा दालचीनी के चूर्ण में 750 मिग्रा कत्था चूर्ण मिला ले इसे पानी के साथ दिन में तीन बार सेवन करे। इससे दस्त पर रोक लगती है।
इसी तरह 4 ग्राम दालचीनी तथा 10 ग्राम कत्था को मिलाकर पीस ले। इसमें 250 मिग्रा खौलते हुए पानी में डालकर ढक दे। दो घंटे बाद इसे छानकर दो हिस्से करके पिए। इससे दस्त बंद हो जाते है।
बेलगिरी के शरबत में 2-5 ग्रा दलचीनी का चूर्ण मिला ले। इसे सुबह-शाम पीने से दस्त की समस्या में लाभ होता है।
12-आमाशय विकार में - दालचीनी इलायची और तेजपत्ता को बराबर-बराबर लेकर काढ़ा बना ले। इसके सेवन से आमाशय की ऐठन ठीक होती है।
13-आंतो के रोग में - आंतो को स्वस्थ रखने के लिए भी दालचीनी का इस्तेमाल करना अच्छा परिणाम देता है। दालचीनी का तेल पेट पर मलने से आंतो का खिचाव दूर हो जाता है।
14-चर्म रोग में - चर्म रोग को ठीक करने के लिए शहद एवं दालचीनी को मिलकर रोग वाले अंग पर लगाए। आप देखेंगे की थोड़े ही दिनों में खुजली-खाज, तथा फोड़े-फुंसी ठीक होने लगेंगे।
15-बुखार में लाभ - 1 चम्मच शहद में 5 ग्राम दालचीनी का चूर्ण मिला ले, सुबह दोपहर और शाम को सेवन करने से ठंड के साथ आने वाला संक्रामक बुखार ठीक होता है।
16-गठिया में लाभ - 10-20 ग्रा दालचीनी के चूर्ण को 20-30 ग्रा मधु में मिलाकर पेस्ट बना ले। इसे दर्द वाले स्थान पर धीरे-धीरे मालिश करे। इससे फायदा मिलेगा।
नुक्सान - जैसे कोई भी चीज किसी के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन जरूरी नहीं की इससे सभी को फायदा मिले। दुसरे व्यक्ति को उससे हानि भी हो सकती है। इसी तरह दालचीनी के नुक्सान भी होते है।
दालचीनी का अधिक मात्रा में सेवन करने से सिरदर्द की शिकायत हो सकती है।
दालचीनी गर्भवती स्त्रियों को नहीं देनी चाहिए, क्योंकि यह गर्भ को गिरा देती है।
इसलिए दालचीनी के नुक्सान से बचने के लिए इस्तेमाल से पहले चिकित्सक से सलाह जरूर ले।
उपयोगी भाग - पत्ते, छाल, जड़
स्वाद बढ़ाने के लिए - दालचीनी के पत्ते और छाल के उपयोगी से केक, मिठाई और खाने का स्वाद बढ़ाया जाता है। दालचीनी का तेल इत्र, मिठाई और पेय में उपयोग किया जाता है।
सावधानी - दालचीनी उष्ण गुणधर्म की है, इसलिए गर्मी के दिनों में कम उपयोग करे।
दालचीनी से पित्त बढ़ सकता है।
उष्ण प्रकृति के लोग चिकित्सक से सलाह ले

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
यदि आप कुछ भी और जानकारी चाहते है, तो आप यहाँ लिख सकते है। धन्यबाद