गुरुवार, 3 सितंबर 2020

गिलोय के फायदे , giloy benifits in hindi ,




गिलोय एक  बहुवर्षीय लता होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते है। आयुर्वेद में इसको कई नामो से जाना  जाता है। यथा अमृता, गुडुची, छिन्नरहा, चक्रांगी, आदि बहुवर्षीय तथा अमृत के सामान गुणकारी होने से इसका नाम अमृता है। आयुर्वेद साहित्य में इसे ज्वर की महान औषधि माना गया है, एवं जीवंतिका नाम दिया गया है, जिस वृक्ष को यह अपना आधार बनाती है। उसके गुण भी इसमें समाहित रहते है। इस दृष्टी से नीम पर चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ औषधि मानी जाती है। इसका काण्ड छोटी अंगुली से लेकर अंगूठे जितना मोटा होता है। बहुत पुरानी गिलोय में यह बाहु जैसा मोटा भी हो सकता है। 


गिलोय के अवयव - एक ग्लूकोसाइड गिलोइन के कारण इसका स्वाद कड़वा होता है। इसमें कोलाम्बिन, टिनोस्पोरेसाइड, पॉमेटिन, बरशोरिंडाई, सैकेराइड, कोलीन तथा टीनोस्पोटिक एसिड पाया जाता है। यह सभी जैव सक्रिय पदार्थ है, इनकी पत्तियों में प्रचुर मात्रा में कैल्सियम फास्फोरस तथा प्रोटीन पाया जाता है। यह वात, कफ और पित्तनाशक होती है। इसमें एंटीवायरल और एंटीबायोटिक तत्त्व भी पाया जाता है।


मधुमेह के रोगियों के लिए - गिलोय एक ह्यपोग्लाइसेमिक एजेंट है, यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फायदा टाइप टू डयबिटीज के मरीजों को होता है। 


पाचन शक्ति बढ़ाती है -  यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामो को भली-भाति संचालित करती  है, और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद करती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बड़ियों से बचा रहता है।


कम करती है स्ट्रेस - गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुकी है। गिलोय एडप्टोजन की तरह कम करती है, और मानसिक तनाव और चिंता के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है। बल्कि मष्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरुस्त रहती है, और एकाग्रता बढ़ती है।  


आँखों की रोशनी के लिए - गिलोय को पलकों के उपर लगाने पर आँखों की रौशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाए। 


अस्थमा के रोगियों के लिए - मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा। 


गठिया के रोगियों के लिए -  गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ो में दर्द होता है, बल्कि चलने फिरने में भी परशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते है। जिसकी वजह से यह जोड़ो के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुँचाती है।


एनीमिया के रोगियों के लिए - भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित रहती है। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है, और एनीमिया से छुटकारा मिलता है। 


कान का मैल निकालने के लिए - कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है, तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल ले और ठंडा करके छान ले और कुछ बूँद कान में डाले। एक-दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर आएगा।   


पेट की चर्बी कम करने के लिए - गिलोय शरीर के उपापचय को ठीक करती है, सूजन कम करती है, और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है।


यौनेच्क्षा बढ़ाती है गिलोय - आप किसी दवा के बिना यौनेच्क्षा बढ़ाना चाहते है, तो गिलोय का सेवन कर सकते है।  गिलोय में यौनेच्क्षा बढ़ाने वाले गुण पाए जाते है, जिससे यौन सम्बन्ध बेहतर होते है। 


पीलिया  में गिलोय के फायदे - पीलिया में गिलोय के 4-5 पत्तो और 5 इंच की लता को लेकर जूस निकालकर हर एक दिन छोड़कर पूरे 10 दिन पीने से पीलिया से छुटकारा मिल जाता है, इसकी लताओं का काढ़ा भी तैयार करके पिया जा सकता है। चूकी इसका स्वाद थोड़ा तीखा होता है, इसलिए इसमें थोड़ी सी मिश्री भी मिला सकते है। (जिनको मधुमेह न हो )  




गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालो पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है   


जवा रखती है गिलोय - गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते है, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे मुहांसे बारीक लकीरे और झुर्रिया दूर की जा सकती है। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते है। जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते है। तो घाव जल्दी भरते है। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाये अब एक बर्तन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबाले गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाये ठंडा करके घाव पर लगाए इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है।


बालो की समस्या के लिए - अगर आप के बालो में डैंड्रफ, बाल झड़ने या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओ से जूझ रहे है, तो गिलोय के सेवन से आपकी ये समस्याए भी दूर हो जाएंगी। 


गिलोय जूस - गिलोय की डंडियों को छील ले और इसमें पानी में मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस ले छान के  सुबह-सुबह खाली पेट पी ले। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है।    


गिलोय का काढ़ा - चार इंच लम्बा गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट ले इन्हे कूट कर एक कप पानी में उबाल ले पानी आधा होने पर इसे छान कर पिए अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग,अदरक,तुलसी भी डाल  सकते है। 


गिलोय पाउडर - यू तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है, पर आप इसे घर पर भी बना सकते है, इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सूखा ले सूख जाने पर मिक्सी में पीसकर पाउडर बनाकर रख ले। 


गिलोय वटी - बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती है, अगर आपके घर पर या आस-पास ताज़ा गिलोय उपलब्ध नहीं है, तो आप इनका सेवन करे। 



अलग-अलग बीमारियों में प्रयोग - अरंडी यानि कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउठ (जोड़ो का गठिया ) की समस्या में आराम मिलता है, इसे अदरक के साथ मिलाकर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है। चीनी के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर सम्बन्धी बीमारियां दूर होती है। आर्थराइटिस से आराम के लिए इसे घी के साथ इस्तेमाल करे। कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खाये।


साइड इफ्फेक्ट का रखे ध्यान - वैसे तो गिलोय को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आये है,लेकिन चूकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नज़र रखे की ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाए। 


पीलिया की तासीर कैसी है - हर मौसम में गिलोय खाना ठीक नहीं माना जाता है। आयुर्वेद की किताबो में गिलोय की तासीर गर्म बतायी गई है। सर्दी-जुकाम और बुखार में  गिलोय लाभदायक है। 


वर्षाऋतु का काल है अपने घर में बडे गमले या आँगन में जहां भी उचित स्थान हो गिलोय की बेल अवश्य लगाए एवं स्वजन को भी देवे यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नहीं बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय अवदान है।




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